कबीर और नागार्जुन समाज में हमेशा प्रासंगिक रहेंगे-डॉ प्रभात
एस. पी. सक्सेना/समस्तीपुर (बिहार)। मध्यकालीन इंकलाबी कवि कबीर और आधुनिक जनकवि नागार्जुन की ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा 29 जून को जयंती है। कबीर और नागार्जुन दोनों ने ही अपने -अपने समय में शोषक, शासकों एवं दमनकारी सामंती तथा पूंजीवादी व्यवस्था से सीधी मुठभेड़ की थी और मनुष्यता की मुक्ति का मार्ग प्रशस्त किया था।
आज के कॉर्पोरेट परस्त फासिस्ट बर्बरता के दौर में भी कबीर और नागार्जुन दोनों ही इस व्यवस्था से मुठभेड़ करने वाली मुक्तिकामी जनता के प्रेरणा स्रोत हैं। इसलिए जन संस्कृति मंच मिथिलांचल के तत्वावधान में पूरे मिथिलांचल में कबीर और जनकवि नागार्जुन का जयंती समारोह मनाया गया। इस अवसर पर अभिव्यक्ति के खतरे उठाने ही होंगे सांस्कृतिक जन जागरण यात्रा का कार्यक्रम पूरे मिथिलांचल में आयोजित किया गया। सांस्कृतिक जन जागरण यात्रा जत्था का प्रारंभ समस्तीपुर के लेनिन आश्रम स्थित भाकपा-माले जिला कार्यालय से 29 जून सुबह साढ़े आठ बजे किया गया।
इस अवसर पर जत्था को संबोधित करते हुए भाकपा माले समस्तीपुर जिला सचिव प्रो. उमेश कुमार और जन संस्कृति मंच के जिलाध्यक्ष डॉ प्रभात कुमार ने कहा कि कबीर और नागार्जुन हमेशा प्रासंगिक रहेंगे। उनकी रचनाएं अमर हैं। जत्था जन संस्कृति मंच बिहार के सचिव कॉमरेड दीपक सिन्हा के नेतृत्व में प्रस्थान किया जिसमें जसम समस्तीपुर के कार्यकारी जिला सचिव रंजन कुमार, जिला उपाध्यक्ष अरविंदानंद, जन गायक कॉ विद्यानंद दास और कॉ जसबिंदर राम शामिल थे।
जन संस्कृति मंच के जिलाध्यक्ष प्रो. प्रभात कुमार, भाकपा-माले जिला सचिव कॉ किसान नेता ने भी अपने विचार रखे। मौके पर प्रो. उमेश कुमार, डॉ प्रभात कुमार, ललन कुमार सहित उपस्थित सभी जनों ने हरी झंडी दिखाकर दरभंगा होते मधुबनी जिला के हद में हुसैनपुर सतलखा स्थित नागार्जुन की जन्मभूमि के लिए जत्था को रवाना किया। जत्था में जसम के रंजन कुमार, अरविंद आनन्द, विद्यानन्द दास, जसविन्दर राम आदि शामिल थे।
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