अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। टोपो लैंड संघर्ष समिति के तत्वावधान में सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर चाई टोला स्थित देवी स्थान परिसर में 22 जुलाई की शाम एक महत्वपूर्ण जनसभा का आयोजन किया गया। सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ समाजसेवी डी. एन. राय जबकि संचालन वीरेन्द्र शर्मा ने किया।
बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, युवाओं एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। इस दौरान टोपोलैंड से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा की गई तथा अपनी पैतृक भूमि और अधिकारों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक संघर्ष को और अधिक सशक्त बनाने का सामूहिक संकल्प लिया गया।
संघर्ष समिति के अध्यक्ष विनोद सम्राट ने अपने संबोधन में कहा कि टोपोलैंड का मुद्दा केवल जमीन का नहीं, बल्कि यहां के रहिवासियों के सम्मान, अधिकारों और भविष्य से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि टोपोलैंड संघर्ष समिति पूरी तरह लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से रहिवासियों की आवाज बुलंद कर रही है और अब इस आंदोलन को गांव-गांव तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपील की कि वे किसी भी प्रकार के भ्रम या दबाव में आए बिना एकजुट रहें और अपनी माटी की रक्षा के लिए सक्रिय भागीदारी निभाएं।
सभा में उपस्थित वक्ताओं ने जोर देकर कहा कि जनसमर्थन ही किसी भी जनांदोलन की सबसे बड़ी शक्ति होती है। बैठक में प्रत्येक टोला और पंचायत स्तर पर रहिवासियों को टोपोलैंड के वास्तविक मुद्दों से अवगत कराने के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाने तथा अधिक से अधिक रजिवासियों को आंदोलन से जोड़ने की रणनीति पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
सभा में विशेष रूप से युवाओं की भूमिका को आंदोलन की सफलता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए उन्हें संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपने और उनकी सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया। सभा को धर्मनाथ शर्मा, सरपंच भरत सिंह, अशोक साह, बनारसी सिंह, जितेंद्र सिंह उर्फ दुलारू, कुमार अरुणेश, पवन शर्मा, रामजी शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जब तक टोपोलैंड से जुड़े रहिवासियों को न्याय नहीं मिल जाता, तब तक यह संघर्ष पूरी मजबूती और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
सभा के अंत में संघर्ष समिति ने निर्णय लिया कि आगामी दिनों में विभिन्न गांवों और टोलों में जनसंपर्क अभियान चलाकर आमजनों को आंदोलन से जोड़ा जाएगा तथा जनभागीदारी को और अधिक व्यापक बनाया जाएगा, ताकि टोपोलैंड से प्रभावित परिवारों के अधिकारों की प्रभावी ढंग से रक्षा की जा सके।
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