रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो की गंगा माने जाने वाली गरगा के तट पर 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा से शुभ अवसर पर स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा हजारों दीप जलाकर गर्ग-गंगा दीपोत्सव का भव्य आयोजन किया गया।
ज्ञात हो कि, गरगा नदी का संबंध भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के लिए बोकारो के कसमार में द्वापर युग में आयोजित एक यज्ञ से है। जिसमें गंगाजल प्राप्त करने हेतु गर्ग ऋषि ने अपने तपोबल से भूगर्भ से इसे उत्पन्न किया था। इस नदी का पौराणिक नाम गर्ग-गंगा है। आज यह पवित्र नदी चास नगर निगम और बोकारो इस्पात नगर की गंदी नालियों के सिवरेज से होने वाले दूषित जल के प्रवाह से पूरी तरह प्रदूषित हो गई है। यह नदी अब अंतिम सांस ले रही है, मगर बोकारो जिला प्रशासन, चास नगर निगम के साथ राज्य सरकार की अनदेखी एवं लापरवाही के कारण इसे प्रदूषण मुक्त करने हेतु कोई भी प्रयास नहीं किया जा रहा है।
स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान द्वारा विगत कई वर्षों से गरगा नदी के तट पर अनेक प्रकार के कार्यक्रम पूरे साल करके जिला प्रशासन और राज्य सरकार का ध्यान आकृष्ट किया जाता है। उक्त गर्ग-गंगा दीपोत्सव भी मनाने का यह एक मुख्य कारण है।
कार्तिक पूर्णिमा के के अवसर पर आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम में सुरेंद्र पांडेय, शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’, रघुवर प्रसाद, बबलू पांडेय, ललन कुमार निषाद, मृणाल चौबे, ललित प्रसाद, अजीत भगत, सुनील सिंह, अभय कुमार गोलू, गौरी शंकर सिंह, मनीष झा, ललित कुमार, सुनील झा, सतीश सिंह, राहुल कुमार, महेश ओझा, संजय तिवारी, राज कुमार, अखिलेश सिंह, आनंद शर्मा, संजीव शर्मा, अमर मिश्रा, आयुषी कुमारी, पूजा कुमारी, ऋषभ कुमार, आकाश कुमार, मिथिलेश शर्मा सहित अनेकों पर्यावरण प्रहरी उपस्थित थे।
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