रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। प्रखंड क्षेत्र की बढ़ती जनसंख्या, शिक्षा सुविधाओं की कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्कूलों के अभाव को देखते हुए स्थानीय रहिवासियों एवं जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से केंद्र और राज्य सरकार से कसमार में केवी खोलने की प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है।
प्रखंड के ग्रामीण रहिवासियों का कहना है कि प्रखंड के बच्चों को बेहतर शिक्षा के लिए बोकारो अथवा दूरस्थ स्थानों की यात्रा करनी पड़ती है, जिससे समय और आर्थिक बोझ दोनों बढ़ते हैं। केंद्रीय विद्यालय की स्थापना से यहां के कमजोर तबके के बच्चों को भी राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा उपलब्ध हो सकेगी।
कसमार प्रखंड प्रमुख नियोती कुमारी ने केंद्रीय विद्यालय की मांग को पूरी तरह न्यायोचित बताते हुए 23 नवंबर को भेंट में कहा कि कसमार प्रखंड में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना यहां के विद्यार्थियों का हक़ है। उन्होंने कहा कि आज भी हमारे बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए दूर-दराज़ के स्कूलों पर निर्भर हैं। यदि कसमार में केंद्रीय विद्यालय खुलेगा, तो पूरे क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा सुधार आएगा। वे बोकारो जिला प्रशासन और सरकार से आग्रह करती है कि उक्त मांग पर शीघ्र निर्णय लिया जाए। कसमार की जनता लंबे समय से इसका इंतज़ार कर रही है।
स्थानीय बुद्धिजीवियों और अभिभावकों का समर्थन
क्षेत्र के शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों ने भी कसमार में केवी खोलने के प्रस्ताव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि प्रखंड की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या घनत्व और प्रशासनिक दायरा केंद्रीय विद्यालय के लिए पूरी तरह उपयुक्त है। अभिभावकों का तर्क है कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) मानक, अधिकारिक शिक्षक, साइंस व कंप्यूटर लैब, खेल परिसर और समान शिक्षा प्रणाली बच्चों के भविष्य को नई दिशा देगी।
जल्द सौंपा जाएगा स्मार-पत्र
स्थानीय पंचायत प्रतिनिधियों, प्रखंड स्तरीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने बताया कि कसमार में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना को लेकर वे शीघ्र ही जिला प्रशासन के माध्यम से सरकार को स्मार पत्र (मेमोरेंडम) सौंपेंगे, ताकि मांग को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाया जा सके।
क्यों है केंद्रीय विद्यालय की जरूरत:- प्रखंड में गुणवत्तापूर्ण स्कूलों की कमी दूर कर अध्ययन के कारण बच्चों की सुरक्षा व समय संबंधी चुनौतियाँ, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर बोझ, क्षेत्र में सीबीएसई आधारित शिक्षा की बढ़ती मांग, कसमार व आसपास के पंचायतों की बड़ी आबादी को लाभ शामिल है। स्थानीय रहिवासियों को उम्मीद है कि सरकार उनकी मांग पर सकारात्मक कदम उठाएगी और कसमार प्रखंड को भी जल्द केंद्रीय विद्यालय की सुविधा मिलेगी।
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