एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। जेपीएससी एवं जेएसएससी पर भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास को बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। अपने शासनकाल की भर्ती विवादों पर उपरोक्त पहले जवाब दें, फिर युवाओं के भविष्य की बात करें। उक्त बाते झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 27 जुलाई को कही।
प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं बाबूलाल मरांडी, अर्जुन मुंडा और रघुवर दास को जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती मामलों पर उपदेश देने से पहले अपने शासनकाल के दौरान भर्ती परीक्षाओं से जुड़े विवादों, किये गये भ्रष्टाचार, नियुक्ति घोटालो पर जनता के सामने भी अब जवाब देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में भर्ती प्रक्रिया पर लगातार गंभीर सवाल उठे, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास डगमगाया।
उन्होंने कहा कि आज भाजपा युवाओं की हितैषी बनने का प्रयास कर रही है, जबकि उसके शासनकाल में भर्ती परीक्षाओं को लेकर व्यापक विवाद ,भ्रष्टाचार के मामले और पैसा पैरवी लेकर नियुक्त किये जाने के मामले सामने आए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्षों तक अभ्यर्थियों ने पारदर्शिता, निष्पक्षता और समयबद्ध नियुक्तियों की मांग को लेकर संघर्ष किया। कहा कि भाजपा के उपरोक्त नेतागण अब दूध के धुले और राजा हरिश्चंद्र बनने का नौंटकी कर रहे है।
नायक ने कहा कि बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में प्रथम और द्वितीय जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2000-08) से जुड़े मामले में अनियमितताओं के आरोपों की सीबीआई जांच हुई। उन्होंने कहा कि इस मामले में तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष डॉ दिलीप कुमार प्रसाद सहित सभी सदस्य के विरुद्ध कार्रवाई हुई तथा वर्ष 2024 में सीबीआई द्वारा 60 आरोपियों के विरुद्ध आरोप पत्र दायर किया गया था। कहा कि अर्जुन मुंडा के कार्यकाल में जेपीएससी की दूसरी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा (2004) में 172 पदों के लिए परीक्षा ली गयी, प्रारंभिक परीक्षा में नियमानुसार 1,720 अभ्यर्थी सफल होने चाहिए थे, लेकिन आयोग ने 16,314 को सफल घोषित कर दिया।
मुख्य परीक्षा में भी नियमानुसार अधिकतम 516 सफल होने चाहिए थे, पर 804 घोषित किये गये। सीबीआइ ने दूसरी सिविल सेवा परीक्षा की कॉपियों की जांच कर जो रिपोर्ट सौंपी है उसमें साफ है कि किस प्रकार ओएमआर शीट में गड़बड़ी की गयी। कहा कि सीबीआइ ने बताया है कि शीट में जिन अभ्यर्थी ने कम गोले भरे, उन्हें भी भरपूर अंक दिया गया। गोपाल सिंह जो जेपीएससी के तत्कालीन सदस्य थे, उनके पुत्र कुंदन कुमार सिंह ने ओएमआर में सिर्फ 19 गोले भरे थे, लेकिन रिजल्ट में उन्हें 88 अंक दे दिये गये। अंत में वे चयनित भी हुए। ऐसा ही कई कॉपियों में पाया गया। ऐसे में यह तय है कि जिन्हें नौकरी मिल गयी है, वह भी अब बचेगी या नहीं यह सवालों के घेरे में है। उन्होंने कहा कि यह मामला झारखंड की भर्ती व्यवस्था पर लंबे समय तक प्रश्नचिह्न बना रहा।
उन्होंने कहा कि प्रथम जेपीएससी परीक्षा के समय भी विवाद उठे थे, जबकि रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में भी जेपीएससी और जेएसएससी की कई भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध दर्ज कराया। उनके अनुसार, भाजपा को पहले इन सवालों पर अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। प्रदेश प्रवक्ता नायक ने कहा कि यदि भाजपा वास्तव में युवाओं के साथ खड़ी है, तो उसे अपने शासनकाल की सभी भर्ती प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल राजनीतिक आरोप लगाने से युवाओं का विश्वास वापस नहीं आएगा। ये वो है जिन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी में भ्रष्टाचार, नियुक्ति घोटाला का बीजारोपण करने का कार्य किया था। कहा कि आज सुपवा दूसे चलनिया को चलनिया दुसे सुपवा की कहावत को चरितार्थ कर रहे है।
नायक के अनुसार वर्तमान झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार युवाओं की सच्ची रक्षक और न्याय की गारंटी है, जबकि भाजपा युवाओं की सबसे खूंखार दुश्मन, भ्रष्टाचार की जननी, लुटेरों की सरपरस्त और बेशर्म पार्टी साबित हुई है। नायक ने साफ़ शब्दों में कहा कि वर्तमान हेमंत सोरेन सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों में जीरो टोलरेंस की नीति अपना कर ठोस कार्रवाई किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि वर्ष 2024 जेएसएससी सीजीएल परीक्षा में लीक की खबर मिलते ही परीक्षा रद्द कर दी गई और एसआईटी जांच में कई गिरफ्तारियां हुईं। इस वर्ष 2026 उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामले में 159 अभ्यर्थियों समेत संगठित गिरोह के कई सदस्यों को जेल की सलाखों के पीछे धकेला गया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस की मांग स्पष्ट है कि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी करने वाले के विरुद्ध, चाहे उनका राजनीतिक या प्रशासनिक प्रभाव कुछ भी हो, निष्पक्ष और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। कहा कि झारखंड कांग्रेस मांग करती है कि भाजपा शासनकाल सहित सभी विवादित जेपीएससी एवं जेएसएससी भर्ती मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जाए। दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों, बिचौलियों और अन्य संबंधित के विरुद्ध कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। भर्ती परीक्षाओं को पूर्णतः पारदर्शी, डिजिटल और पेपर-लीक मुक्त बनाया जाए। युवाओं का विश्वास बहाल करने के लिए समयबद्ध और जवाबदेह भर्ती व्यवस्था लागू की जाए।
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