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आदिवासी सरना समिति ने मनाया प्राकृति महापर्व सरहुल

प्रकृति की आराधना का पर्व विभिन्न जनजातियों के बीच प्रसिद्ध है सरहुल पर्व-राजेन्द्र मंडल

प्रहरी संवाददाता/विष्णुगढ़ (हजारीबाग)। विष्णुगढ़ प्रखंड (Vishnugarh block) के हद में नरकी पंचायत में बीते 4 अप्रैल को आदिवासी सरना समिति के द्वारा धूमधाम से सरहुल प्राकृति महापर्व माना गया।

इस अवसर पर आदिवासी समुदाय के लोगों ने पारंपारिक विधिवत के साथ साल वृक्ष की पूजा अर्चना कर गांव की सुख समृद्धि हरी-भरी रहने की आराधना की। तत्पश्चात पूजा खत्म होने के बाद आदिवासी महा जुटान में पर्व को लेकर पारंपरिक सांस्कृतिक झारखंड की माटी गीत संगीत नित्य कला कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम (Program) के अवसर पर मुख्य अतिथि प्रखंड विकास पदाधिकारी संजय कोंगारी, समाजसेवी राजेंद्र मंडल, मुखिया फूलचंद मांझी, डॉ रितलाल महतो, पंचायत समिति सदस्य बेबी देवी, शकुंतला देवी, छोटी शर्मा, गणेश साव मुख्य रूप से उपस्थित हुए।

इस अवसर पर राजेंद्र मंडल ने समस्त झारखंड वासियों (People of Jharkhand) को प्राकृतिक महापर्व सरहुल की बधाई दी। साथ ही हुल जोहार कर बताया कि यह पर्व सरहुल आदिवासियों का प्रमुख पर्व है, जो झारखंड, उड़ीसा और बंगाल के आदिवासी द्वारा मनाया जाता है।

यह उत्सव चैत्र महीने के तीसरे दिन चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है। इसमें वृक्षों की पूजा की जाती है। यह पर्व नये साल की शुरुआत का भी प्रतीक माना जाता है।

उन्होंने बताया कि प्राचीन काल में आदिवासी समाज प्रकृति के प्रति अपनी श्रद्धा को इस पूजा में प्रदर्शित करते थे। जब तक जंगल के फल, फूल, पत्ते को प्रकृति के प्रति पूजा कर अर्पण नहीं करते थे, तब तक जंगल के किसी भी नए फल, फूल, पत्तियों का सेवन नहीं करते थे। यह अद्भुत, आश्चर्यजनक, अलौकिक पूजा प्रसिद्धि है, जो प्राचीन काल से वर्तमान समय में भी प्राकृतिक को पूजा करने के बाद ही नए फल फूल को ग्रहण कर नए साल की शुरुआत करते हैं।

उन्होंने कहा कि प्राकृति हमें हरे भरे फल, फूल वातावरण के साथ शुद्ध ऑक्सीजन देती है। संकल्प कर प्रकृति की रक्षा और सम्मान करें। प्राकृति हम सबों की देवता है। हम सबो की रक्षा करेगी।

मौके पर उपरोक्त के अलावा सुरेश मरांडी, महावीर मांझी, छोटू हांसदा, सरना समिति अध्यक्ष बाबुराम, जेएमएम (JMM) अध्यक्ष देवी राम, विशेश्वर सिंह, कुलदीप राम, प्रभु गंझू, चेरकु मांझी, मुस्तकीम अंसारी, सोना राम, बहा राम इत्यादि सैकड़ो आदिवासी महिला पुरुष उपस्थित थे।

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