एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। एनसीईआरटी द्वारा कक्षा 11वीं और 12वीं की राजनीति विज्ञान (पॉलिटिकल साइंस) पाठ्य पुस्तक तैयार करने के लिए गठित नई समिति को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उक्त जानकारी एआईएसएफ रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने 19 अगस्त को दी।
एआईएसएफ जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने कहा कि एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, समिति के कम-से-कम चार सदस्यों के आरएसएस, एबीवीपी या बीजेपी से प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष संबंध बताए गए हैं। एहतेशाम ने कहा कि राजनीति विज्ञान की किताब लोकतंत्र और संविधान की पाठशाला होनी चाहिए, किसी एक विचारधारा का प्रचार माध्यम नहीं। उन्होंने कहा कि समिति में वैचारिक विविधता और स्वतंत्र शिक्षाविदों की पर्याप्त भागीदारी जरूरी है।
उन्होंने सवाल उठाया कि भारतीय ज्ञान प्रणाली के नाम पर छात्रों को भारत की बहुलतावादी परंपरा पढ़ाई जाएगी या किसी विशेष विचारधारा का नजरिया? कहा कि क्या नई किताबों में संविधान, मौलिक अधिकार, धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, संघवाद और लोकतांत्रिक असहमति को समान महत्व मिलेगा?
एहतेशाम परवीन ने कहा कि बच्चों को तैयार राजनीतिक निष्कर्ष नहीं, बल्कि सवाल पूछने और तर्क करने की आजादी मिलनी चाहिए। पॉलिटिकल साइंस की किताब विचारधारा नहीं, लोकतांत्रिक सोच पैदा करे। उन्होंने कहा कि एआईएसएफ ने एनसीईआरटी से मांग की है कि समिति के सदस्यों की अकादमिक योग्यता और संस्थागत संबद्धताओं को सार्वजनिक किया जाए तथा अंतिम पाठ्य पुस्तक तैयार करने से पहले स्वतंत्र शिक्षाविदों, राजनीतिक वैज्ञानिकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों से व्यापक राय ली जाए। कहा कि एआईएसएफ ने स्पष्ट किया कि शिक्षा में किसी भी प्रकार के वैचारिक एकाधिकार का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाएगा।
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