मौलिक अधिकारों के लिए एक और लड़ाई के लिए शिक्षा जरूरी-विधायक
सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में जगन्नाथपुर के रस्सैल उच्च विद्यालय प्लस टू परिसर में कांग्रेस पार्टी द्वारा 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भव्य सांस्कृतिक रैली निकाली गई।
इस अवसर पर पारंपरिक ढोल-नगाड़ों के साथ समाज के प्रबुद्ध जनों ने सामूहिक नृत्य करते नगर का भ्रमण किया और रितुई गुंडुई शहीद स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना कर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम स्थल पर जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी रफाएल मुर्मू, बीडीओ अम्बिका कुमारी, सीओ मनोज मिश्रा ने बिरसा मुंडा, फूलो-झानो, पोटो हो, सिद्धू कान्हु, ओत गुरु लाको बोदरा, एवं जयपाल सिंह मुंडा के चित्र पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक
इस अवसर पर आयोजित लोकनृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद तमाम जनों का मन मोह लिया। मौके पर उपस्थित विभिन्न लोकनृत्य दलों, मुंडा-मानकी, डाकुवा, दिउरी, पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों एवं पत्रकारों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विधायक सोनाराम सिंकु ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस आदिवासी समाज की जागरूकता, एकता और अधिकारों को समझने का अवसर है। कहा कि हमारे पूर्वजों ने आजादी और अपने अधिकारों के लिए संघर्ष किया, लेकिन समाज को उचित सम्मान दिलाने के लिए आज भी हमें आगे बढ़ने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बिना अंधकार ही अंधकार है। समाज के हर बच्चे को शिक्षित करना होगा। पिछड़ेपन को दूर करने के लिए शिक्षा ही सबसे बड़ा हथियार है।
विधायक ने युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर विशेष ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि समाज के विकास के लिए शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी होगी। साथ ही नशामुक्त समाज बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि नशामुक्ति ही विकास की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि आज आदिवासी समाज की बेटी देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंच चुकी है, फिर भी समाज के सामने कई चुनौतियां हैं। इन चुनौतियों से निपटने के लिए शिक्षा, जागरूकता और सामाजिक एकता जरूरी है।
विधायक ने जल, जंगल और जमीन की रक्षा, आदिवासी धर्म-संस्कृति एवं परंपराओं को संरक्षित रखने तथा समाज को नशा और कुरीतियों से दूर रखने पर जोर दिया। कहा कि आदिवासी समाज की पहचान हमारे वीर पूर्वजों बिरसा मुंडा, सिद्धू-कान्हू, पोटो हो, नारा हो, पांडू हो और अन्य वीरों के संघर्षों की देन है। इसलिए अपनी संस्कृति और पहचान को बचाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल आदिवासी समाज का ही नहीं, बल्कि सभी जाति और धर्म के लिए गौरव एवं एकता का संदेश देने वाला दिवस है।
![]()













Leave a Reply