सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिम सिंहभूम)। विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर 9 अगस्त को पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद में सारंडा के विभिन्न गांवों से ग्रामीण समूह बनाकर छोटानागरा और जामकुंडिया पहुंचे। किसी के हाथ में पारंपरिक वाद्य यंत्र था तो कोई मांदर और नगाड़े की थाप पर नाचता-गाता कार्यक्रम स्थल तक पहुंचा।
सारंडा क्षेत्र के हो, संथाल, मुंडा, उरांव सहित विभिन्न आदिवासी समुदायों की रहिवासी महिलाओं और पुरुषों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा में हिस्सा लेकर कार्यक्रम को सांस्कृतिक रंग दिया। बच्चे और युवा भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम में शामिल हुए।
इस अवसर पर गांवों से पहुंचे समूह अपने साथ चावल और अन्य खाद्य सामग्री भी लेकर आए थे। रास्ते भर मांदर और ढोल की थाप के साथ पारंपरिक गीत और नृत्य का दौर चलता रहा। इससे छोटानागरा और जामकुंडिया बाजार का वातावरण पूरी तरह उत्सवमय हो गया।
विश्व आदिवासी दिवस पर यहां आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने आदिवासी समाज की एकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज में जिस दिन पूरी एकता स्थापित हो जाएगी, उस दिन मानकी-मुंडा, सामाजिक व्यवस्था और पारंपरिक व्यवस्था भी पूरी मजबूती के साथ एकजुट होकर काम करेगी। उन्होंने कहा कि आज समाज में एकता की कमी के कारण आदिवासी समुदाय अपने कई अधिकारों से वंचित हो रहा है। उन्होंने आमजनों से अपनी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करने का आह्वान किया।
कोड़ा ने कहा कि छोटानागरा में जल्द ही वीर बिरसा मुंडा की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के महानायकों की स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि युवा उनके संघर्ष और बलिदान से प्रेरणा ले सके।
![]()













Leave a Reply