एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। इलेक्शन कमीशन ने राज्य के 43 लाख झारखंडी वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया है। अर्थ स्पष्ट है कि घुसपैठिये ने झारखंड राज्य में अपनी नींव रख दी है। उक्त बाते 5 अगस्त को ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) झारखंड प्रदेश सह सचिव एवं रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन ने कही।
उन्होंने कहा कि एक तरफ़ जहां झारखंड सरकार लगातार माइनिंग के रीओपनिंग की लीज़ पर हस्ताक्षर कर चुकी है। स्टील प्लांट से सम्बन्धित 10 एग्रीमेंट और 149 बैंकिंग ब्रांचेज खुलने की घोषणा। झारखंड की राजधानी रांची के सड़कों पर फिरंगियों की दुकानें बड़ी होती जा रही है। लेकिन यहां के मूल रहिवासी सिकुड़ते क्यों जा रहे हैं? झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की जड़ो पर प्रहार क्यों किया जा रहा है? झारखंड के मूलनिवासियों की प्रगति दिन प्रतिदिन धीमी क्यों पड़ती जा रही है?
कहा कि चिंता में मन है कि कही मुझसे कोई चूक तो नहीं हो रही? कही फ़िर से किसी की बस्ती न उजड़ जाए? कही बिरसा की धरती में फ़िर से लूट, हत्या, दमन जैसे आपराधिक गतिविधियां न बढ़ने लग जाए। कही फिर से कोई निर्दोष की बेबसी की कहानी कागज़ी करवाई बन कर न रह जाए।
एहतेशाम के अनुसार इलेक्शन कमीशन की रिपोर्ट एक बड़े ख़तरे की ओर इशारा कर रही है। हम सिर्फ़ कागज़ी करवायी को देख रहे हैं, हक़ीकत हमें नहीं मालूम कि अपनी उपस्थिति दर्ज करने में 1.16 लाख वोटर कैसे इंकार कर गए। ये कौन है? कहीं इनकी पहचान मिटाने की तो साजिश नहीं?
उन्होंने कहा कि हमें इलेक्शन कमीशन की दी गई रिपोर्ट के साथ साथ ग्रामीणों की रिपोर्ट एसआईआर के कार्य को लेकर मांगनी चाहिए। क्राॅस एग्जामिनेशन कराना होगा, अन्यथा इसका परिणाम भयावह हो सकता है।
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