रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। स्वास्थ्य एवं पर्यावरण संरक्षण संस्थान के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने 23 जून को झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से लोकभवन रांची में मुलाकात कर राज्य की गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं एवं प्रमुख नदियों की बदहाल स्थिति से संबंधित विस्तृत स्मार पत्र सौंपा।
संस्थान के महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’ के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल का ध्यान विशेष रूप से बोकारो की जीवन रेखा गरगा नदी तथा उसकी सहायक सिंगारी जोरिया की दयनीय स्थिति की ओर आकर्षित किया। ज्ञापन में कहा गया कि चास नगर निगम क्षेत्र एवं बोकारो इस्पात संयंत्र (सेल) की आवासीय कॉलोनियों से निकलने वाले गंदे नालों का प्रदूषित पानी वर्षों से गरगा नदी में छोड़ा जा रहा है, जिससे नदी का अस्तित्व संकट में पड़ गया है और वह एक बड़े नाले का रूप लेती जा रही है। वहीं, सिंगारी जोरिया भी प्रदूषण और अतिक्रमण की समस्या से जूझ रही है।
स्मार पत्र में कहा गया कि झारखंड की दामोदर, स्वर्णरेखा, बराकर, खांजो, गवाई और इजरी सहित अधिकांश नदियां शहरी कचरे, औद्योगिक अपशिष्ट और रासायनिक प्रदूषण के कारण गंभीर संकट का सामना कर रही हैं। संस्थान ने मांग की कि नदियों में छोड़े जाने वाले गंदे जल को पहले जल शोधन संयंत्रों के माध्यम से शुद्ध किया जाए, उसके बाद ही नदी में प्रवाहित किया जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने धनबाद और फुसरो क्षेत्र में भूगर्भीय कोयला आग से उत्पन्न पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी खतरों पर भी चिंता जताई। ज्ञापन में कहा गया कि कोयलांचल क्षेत्र में धूल, धुआं और प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे लाखों रहिवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रभावी और समयबद्ध कार्य योजना बनाने की आवश्यकता बताई गई।
इसके अलावा बोकारो के आईटीआई मोड़ के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे चास नगर निगम द्वारा लंबे समय से कचरा डंप किए जाने की समस्या भी उठाई गई। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि इससे क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
बताया जाता है कि राज्यपाल ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विषयों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए उचित स्तर पर विचार करने का आश्वासन दिया। ज्ञापन सौंपने वाले प्रतिनिधिमंडल में महासचिव शशि भूषण ओझा ‘मुकुल’, उपाध्यक्ष अखिलेश ओझा, वृक्षारोपण प्रकोष्ठ के संयोजक वीरेंद्र कुमार चौबे तथा सह सचिव विजय प्रसाद गुप्ता शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने झारखंड की नदियों, पर्यावरण संरक्षण और जन स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों के त्वरित समाधान की मांग की।
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