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एसआईआर में अंधाधुंध नोटिस जारी करने का आरोप

आजसू नेता ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। एसआईआर प्रक्रिया के तहत मतदाताओं को जारी किए जा रहे नोटिस को लेकर आजसू पार्टी के केंद्रीय सदस्य सुरजन कपरदार ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नाम, उम्र एवं अन्य विवरणों में मामूली अंतर को आधार बनाकर बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं, जिससे आम रहिवासियों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

आजसू केंद्रीय सदस्य कपरदार ने 14 सितंबर को कहा कि आयोग द्वारा नोटिस जारी करने से पहले यदि संबंधित दस्तावेजों और मतदाता सूची में दर्ज विवरण का सही तरीके से मिलान किया जाता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने कहा कि इसका असर आम मतदाताओं के साथ-साथ प्रखंड स्तर पर कार्यरत अधिकारियों, कर्मचारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों पर भी पर रहा है तथा उन पर अनावश्यक कार्यभार बढ़ गया है।

उन्होंने बताया कि उन्हें स्वयं नाम में मामूली अंतर के कारण नोटिस दिया गया। उनके अनुसार हिंदी में उनका नाम सुरजन कपड़दार, जबकि अंग्रेजी में Surjan Kapardar दर्ज है। उन्होंने इसे टंकण संबंधी त्रुटि बताते हुए कहा कि इस संबंध में आधार कार्ड, सेवा-पेंशन दस्तावेज, फोटो तथा एपिक से संबंधित दस्तावेज बीएलओ के माध्यम से पहले ही जमा किए जा चुके हैं। बावजूद इसके नोटिस दिया जाना समझ से परे है।

कपरदार ने अपने पुत्र अमित राज के मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अमित राज को उनके नाना मिश्री लाल राजवार की उम्र और अमित राज की उम्र में 40 वर्ष से कम अंतर होने के आधार पर नोटिस दिया गया। उनके अनुसार वर्ष 2003 की मतदाता सूची में मिश्री लाल राजवार की उम्र 55 वर्ष दर्ज है, जबकि अमित राज का जन्म वर्ष 1989 में हुआ है। इस आधार पर दोनों की उम्र में 41 वर्ष का अंतर बनता है। संबंधित दस्तावेज भी बीएलओ के माध्यम से जमा किए गए हैं।

आजसू नेता ने कहा कि दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद इस प्रकार के नोटिस जारी होना संबंधित अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों के समुचित सत्यापन पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने चुनाव आयोग से एसआईआर के तहत जारी किए गए नोटिसों की समीक्षा करने तथा दस्तावेजों का उचित सत्यापन करने के बाद ही कार्रवाई करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि एसआईआर जैसी महत्वपूर्ण प्रक्रिया में पारदर्शिता और सावधानी जरूरी है, ताकि वास्तविक मतदाताओं को बेवजह कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और अधिकारियों-कर्मचारियों पर भी अनावश्यक अतिरिक्त कार्यभार न पड़े।

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