अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में विश्व प्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र की पावन धरा, जहां पतित पावनी गंगा और सदानीरा नारायणी (गंडकी) का पावन मिलन होता है, अब अपनी खोई आध्यात्मिक पहचान को पुनः प्राप्त करने जा रही है। जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर संगम की यह भूमि, जो सदियों से अपनी महिमा के लिए जानी जाती रही है, अब गंगा-गंडकी संगम तीर्थ, सबलपुर धाम के रूप में विश्व पटल पर स्थापित होगी।
इस तीर्थ की गरिमा को बढ़ाने के लिए प्रवेश द्वार पर हरिहरनाथ थाना के सामने मही नदी किनारे मुख्य सड़क पर लौह स्तंभों से निर्मित एक भव्य प्रवेश द्वार का निर्माण कराया जा रहा है। जिस पर लगभग 12 लाख रुपये (संभावित वृद्धि के साथ) खर्च का अनुमान है। यह लौह द्वार न केवल स्थापत्य का बेजोड़ नमूना होगा, बल्कि यह क्षेत्र के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का प्रतीक भी बनेगा।
इस द्वार का निर्माण मौनी बाबा के अनन्य भक्त सबलपुर बभनटोली रहिवासी अनिल सिंह गौतम के सौजन्य से हो रहा है। उन्होंने समाज से आह्वान किया है कि इस महोत्सव में हर घर की भागीदारी हो, ताकि यहां आने वाले हर श्रद्धालु को गौरव की अनुभूति हो।
युद्ध स्तर पर तीन दिवसीय आध्यात्मिक महाकुंभ की तैयारियां
ज्ञात हो कि हिंदू जागरण मंच के बिहार -झारखंड के क्षेत्र संयोजक विनोद कुमार सिंह यादव, संत मौनी बाबा, संत लक्ष्मणाचार्य सहित अनेकानेक संतों के मार्गदर्शन में आगामी गंगा दशहरा के अवसर पर सबलपुर में संतों का विराट महासमागम होने जा रहा है। स्थानीय रहिवासियों के व्यापक जन-समर्थन ने इस आयोजन को एक जन-आंदोलन का रूप दे दिया है।
संगम दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को प्रसाद स्वरूप संगम का जल (1 लीटर के जार में) और पावन मिट्टी (100 ग्राम के पैकेट में) स्मृति स्वरूप भेंट में दी जाएगी। श्रद्धालुओं के लिए साक्षात संगम दर्शन के लिए आधा दर्जन बड़ी नौकाओं की व्यवस्था की गई है, जिसका संकल्प वीरबहादुर राय ने लिया है। संत विष्णुदास उदासीन (मौनी बाबा) ने सैकड़ों महिला श्रद्धालुओं को अक्षत, हल्दी और पुष्प देकर घर-घर जन-जागरण का दायित्व सौंपा है।
भारत और नेपाल के प्रतिष्ठित संतों की उपस्थिति इस महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय पहचान देगी। सबलपुर धाम में आयोजित होने वाला यह तीन दिवसीय महोत्सव केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आस्था का एक ऐसा महाकुंभ होगा जहां ज्ञान, संगीत और सेवा की त्रिवेणी बहेगी। आयोजन समिति ने हर दिन के लिए विशेष प्रबंध किए हैं, ताकि यहां आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु की झोली भक्ति के साथ-साथ सुखद स्मृतियों से भी भर जाए।
महोत्सव का भव्य शुभारंभ आगामी 23 मई को होगा। इस्कॉन के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त प्रचारक पूज्य संत सीता रामेश्वर दासजी महाराज अपनी ओजस्वी वाणी से संगम की आध्यात्मिक महिमा पर प्रकाश डालेंगे। प्रतिदिन संध्या 6:30 से रात्रि 9:30 बजे तक चलने वाली इस दिव्य कथा में श्रद्धालुओं को गंडकी और गंगा के पावन मिलन के रहस्यों को जानने का अवसर मिलेगा।
यहां काशी की तर्ज पर महा-आरती होगी, जिससे 25 मई की शाम सबलपुर तट का नजारा अलौकिक होगा। वाराणसी (काशी) के विद्वान ब्राह्मणों और स्थानीय कलाकारों के समन्वय से यहां एक भव्य दिव्य आरती का आयोजन किया जाएगा। दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार के बीच संगम तट पर भक्ति का ऐसा वातावरण बनेगा जो काशी और प्रयागराज की याद दिला देगा।
गंगा अवतरण दिवस संतों का समागम और महाप्रसाद महोत्सव का समापन 26 मई (गंगा दशहरा) को होगा। इस दिन का विशेष आकर्षण संत सम्मेलन होगा, जिसमें भारत और नेपाल के कोने-कोने से पहुंचे सिद्ध महापुरुष भक्तों का मार्गदर्शन करेंगे।
सुबह का आरंभ पावन कलश यात्रा और संगम के शीतल जल में पुण्य स्नान से होगा। साधना और यज्ञ सामूहिक ध्यान और हवन के माध्यम से विश्व शांति की कामना की जाएगी। शिव चर्चा मंडली और लोक सेवा आश्रम, सबलपुर धाम के ग्रामीण सहित पटना व हाजीपुर के भक्तों के सहयोग से यहां निरंतर भंडारा चलेगा, जिसमें आने वाले हर आगंतुक को सप्रेम भोजन कराया जाएगा।
सबलपुर की सामाजिक एकजुटता:
यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब समाज एक लक्ष्य के लिए एकजुट होता है, तो सबलपुर जैसी सुप्त भूमियां भी तीर्थ बनकर चमक उठती हैं। संतों द्वारा वितरित अक्षत और हल्दी का संदेश अब जन-जन का संकल्प बन चुका है। भक्ति का यह प्रवाह केवल जल तक सीमित नहीं है, यह दिलों को जोड़ने का महापर्व है।
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