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अंतिम चरण में पूजा की तैयारी विद्या की देवी सरस्वती की होगी पूजा

ममता सिन्हा/तेनुघाट(बोकारो)। सभी ऋतुओं के अपने रंग और अपना राग है, फिर भी बसंत के ठाठ कुछ निराले हैं। बेरमो (Bermo) अनुमंडल के किसी भी इलाकों में आप अगर घूमने निकले तो देखकर हैरान रह जाएंगे। इस वक्त बसंत उत्सव के आगमन के लिए प्रकृति ने सोलह श्रृंगार किए हैं। पेड़ों से पत्ते झड़ रहे हैं। फिजा में आम के मंजर की भीनी-भीनी खुशबू और कोयल की कूक एक समा बांध रही है।
बसंत प्रेम की ऋतु है। इस दिन विद्या की देवी माता सरस्वती की पूजा की जाती है। हिंदी पंचांग के अनुसार बसंत पंचमी (Basant Panchami) से बसंत मास की शुरुआत होती है। फिर बसंत उत्सव होली तक मनाया जाता है। सभी ऋतुओं के अपने-अपने रंग और अपना-अपना राग होता है। फिर भी बसंत ऋतु के राग कुछ निराले हैं। यह प्रेम की ऋतु है। मधुर श्रृंगार की बेला बसंत में ही आती है। वसंत ऋतुओं का राजा है, जो दूसरी ऋतु का भी बराबर ख्याल रखता है। रचनाधर्मिता से जुड़े लोग इस ऋतु से बहुत प्रभावित होते हैं। इस बार 16 फरवरी को बसंत पंचमी है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी के रूप में मनाया जाता है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। ये दिन ज्ञान, विद्या, बुद्धिमता, कला और संस्कृति की देवी मां सरस्वती को समर्पित होती है।

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