कथारा क्षेत्र के 14 कर्मियों को सेवनिवृत्ति पर दी गई भावभीनी विदाई
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला (Bokaro district) के हद में सीसीएल कथारा महाप्रबंधक कार्यालय सभागार में एक मार्च को विदाई सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर क्षेत्र के 14 सीसीएल कर्मियों को भावभीनी विदाई दिया गया।
इस मौके पर क्षेत्रीय प्रबंधक कार्मिक (Regional Manager Personal) एवं प्रशासन जयंत कुमार ने कहा कि कर्मचारियों के बदौलत ही कंपनी की उत्पादन और तमाम व्यवस्था कायम रहती है। उन्होंने कहा कि सेवा निवृत्ति एक प्रक्रिया है। सेवा निवृत्ति के बाद आपका जीवन कैसे सुखमय हो। इसपर आपको गहन चिंतन करना होगा।

उन्होंने कहा कि कंपनी के लायक जो भी सेवा होगी उसके लिए कंपनी हमेशा तत्पर रहेगी। उन्होंने कोल इंडिया के सीपीआरएमई स्कीम के तहत सेवा निवृत कर्मियों और उनके आश्रितों को दिए जाने वाले मेडिकल सुविधा तथा उसके रिनुअल प्रक्रिया को विस्तार से बताया।
उन्होंने कहा कि जल्द ही स्मार्ट कार्ड के माध्यम से तमाम सेवा निवृत कर्मचारियों का बेहतर इलाज किया जाएगा। कुछ व्यवधान के कारण अभी तक ऑनलाइन सुविधा नहीं हो पाया है।
इस अवसर पर सेवनिवृत जारंगडीह के वरीय डंपर ऑपरेटर सतपाल सिंह ने कहा कि अपनी भावनाओं को काबू में रखकर कंपनी हित में कार्य करने से राष्ट्र का विकास होता है। वहीं एसीसी सदस्यों ने सेवनिवृतो को दिए जानेवाले स्मार्ट कार्ड की अनुपलब्धता एवं उचित सम्मान सामग्री नहीं रहने को लेकर नाराजगी व्यक्त किया।
समारोह का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन उप कार्मिक प्रबंधक गुरु प्रसाद मंडल ने किया। इस अवसर पर क्षेत्रीय सलाहकार समिति सदस्य रामेश्वर साव, पीके जयसवाल, यदुनाथ गोप, शमशुल हक, मो. निजाम अंसारी, अनूप कुमार स्वाईं, बाल गोविंद मंडल, आदि।

धनंजय सिंह के अलावा अधिकारियों में क्षेत्रीय प्रबंधक कार्मिक एवं प्रशासन जयंत कुमार, जारंगडीह एवं कथारा के वरीय कार्मिक प्रबंधक सुभाष चंद्र पासवान, उप कार्मिक प्रबंधक गुरु प्रसाद मंडल, उप प्रबंधक सीएसआर चंदन कुमार, सहायक प्रबंधक (प्रशिक्षु) स्नेहा पटनायक, सेवा निवृत कर्मी विनोद कुमार सिंह, आदि।
बलविंदर सिंह, गणेश सिंह, मिट्ठू रविदास, विनोद कुमार, भीषम कुमार, गजाधर महतो, मनेजर महतो, रमेश नायक, चितरंजन रविदास, राजेंद्र पाल, सतपाल सिंह, बोधा नोनिया और अजय शेखर बोस उपस्थित थे। समारोह को सफल बनाने में महाप्रबंधक कार्यालय कर्मी निरंजन विश्वकर्मा, निवारण केवट, प्रदीप यादव आदि का अहम योगदान रहा।
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