Advertisement

गाजे-बाजे और घोड़ों संग बैजलपुर पहुंचे बाबा जड़भरत, जयकारों से गूंजा गंडक तट

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के बैजलपुर गंडक तट पर स्थित महान तत्वज्ञानी ऋषि बाबा जड़भरत की प्राचीन तपोभूमि पर 26 अक्टूबर को मूर्ति स्थापना को लेकर पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।

इस पावन अवसर पर ग्रामीणों ने बाबा जड़भरत की दिव्य मूर्ति का भव्य स्वागत किया। पूरा आयोजन जड़भरत नाथ मंदिर की नई समिति के कुशल प्रबंधन में संपन्न हो गया। सोनपुर के ऐतिहासिक शिवबच्चन चौक से मूर्ति के साथ विशाल शोभायात्रा निकाली गई। इसमें सैकड़ों ग्रामीण और श्रद्धालु शामिल हुए। पारंपरिक ढोल-ताशे, नगाड़ों और सजे-धजे घोड़ों के साथ निकली यह शोभायात्रा जिस मार्ग से गुजरी, वहां का वातावरण जय बाबा जड़भरत के जयकारों से गूंज उठा।

बताया जाता है कि शिवबचन चौक से शुरू होकर यह शोभायात्रा दामोदरपुर, केशो, जमुनी और नयाटोला होते बैजलपुर स्थित गंडक किनारे प्राचीन स्थल पर पहुंची। पूरे रास्ते जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर और आरती उतार कर मूर्ति का स्वागत किया। मंदिर समिति के सदस्यों ने व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने में सराहनीय भूमिका निभाई।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, महाराज जड़भरत राजा ऋषभदेव के ज्येष्ठ पुत्र थे, जिनके नाम पर ही हमारे देश का नाम भारतवर्ष पड़ा। बैजलपुर स्थित उनके इस प्राचीन आश्रम पर मूर्ति स्थापना को लेकर स्थानीय रहिवासियों में भारी उत्साह है। देर शाम तक वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मूर्ति स्थापना और धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे।

आयोजित शोभायात्रा में प्रभात रंजन, विमल सिंह, चितरंजन सिंह, लव सिंह, राजेश सिंह, पंकज सिंह उर्फ ओमजी, अरुण सिंह, अनूप सिंह, इंद्रदीप सिंह, दिलीप सिंह, संजय सिंह, विकाश सिंह, हुकूमत प्रताप सिंह, श्याम सिंह, बमबम सिंह, हरेराम सिंह, धीरेंद्र सिंह, रौशन सिंह, अंतिम सिंह, मुरली मनोहर, अंकुश, कृष्ण मोहन सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुजन शामिल हुए।

Loading

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *