सिद्धार्थ पांडेय/चाईबासा (पश्चिमी सिंहभूम)। राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा व आपातकालीन सतर्कता के मद्देनज़र तथा आपदा प्रबंधन के निर्देशों के तहत 12 अक्टूबर को आपदा प्रबंधन द्वारा मॉक ड्रिल किया गया। मॉक ड्रिल पश्चिमी सिंहभूम जिला के हद नोवामुंडी स्थित टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल के प्रांगण में आयोजित किया गया।
जानकारी देते हुए डीएवी नोवामुंडी की प्राचार्या शशिकला ने बताया कि इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को किसी भी आकस्मिक संकट, प्राकृतिक आपदा, आगजनी अथवा आपातकालीन परिस्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया और आत्मरक्षा के प्रति जागरूक व तैयार करना था।
अभ्यास के दौरान घंटी बजते ही पूरे विद्यालय में आपातकालीन प्रोटोकॉल का पालन किया गया। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने डेस्क और मजबूत सतहों के नीचे शरण लेकर एवं विद्यालय के क्रीड़ा प्रागण में एकत्रित होकर स्वयं को सुरक्षित करने का अभ्यास किया। साथ ही, बच्चों को बिजली के उपकरण बंद करने, आपात स्थिति में शांत रहने और प्राथमिक उपचार के आवश्यक तौर-तरीके भी बताए गए।
मौके पर मॉक ड्रिल कार्यक्रम के संयोजक सचिन साव ने कहा कि सुरक्षा सिर्फ एक नियम नहीं, बल्कि हमारी पहली प्राथमिकता और जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए।
कहा कि किसी भी आपात स्थिति या आपदा के समय घबराने के बजाय समझदारी, त्वरित निर्णय और सही प्रशिक्षण ही जान-माल की रक्षा कर सकता है। ऐसे मॉक ड्रिल का उद्देश्य बच्चों में सतर्कता, अनुशासन और आमजन की जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि वे न केवल विद्यालय परिसर में बल्कि अपने घरों और समाज में भी किसी संकट के समय एक जागरूक और सक्षम नागरिक की भूमिका निभा सकें।
उक्त कार्यक्रम में कनीय से कक्षा द्वादश तक के कुल 642 बच्चों एवं 22 शिक्षकों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिका तथा समस्त गैर-शैक्षणिक कर्मचारी उपस्थित रहे और उन्होंने मॉक ड्रिल को सफल बनाने में सक्रिय भागीदारी निभाई।
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