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सस्ती होंगी कैंसर की दवा, 70 प्रतिशत तक घट सकती हैं कीमत, अक्टूबर से लागू

कार्यालय संवाददाता/मुंबई। सरकार ने गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को एमआरपी के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। इससे कैंसर की महंगी दवाओं पर मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार ने सभी गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं के ट्रेड मार्जिन को एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) के 30 प्रतिशत तक सीमित करने का फैसला किया है। इससे करीब 110 कैंसररोधी दवाओं की कीमतों में कमी आने की संभावना है। इनमें 35 पेटेंट वाली दवाएं भी शामिल हैं। सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि इस फैसले से दवाओं की कीमत में 70 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

सरकार का उद्देश्य कैंसर की जीवनरक्षक दवाओं की कीमतों में व्यापार स्तर पर होने वाली अत्यधिक बढ़ोतरी पर रोक लगाना और उन्हें मरीजों के लिए अधिक किफायती बनाना है। साथ ही, बाजार में इन दवाओं की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर रहेगा। इस फैसले को इसी महीने के अंत तक लागू किए जाने की उम्मीद है। सूत्रों के अनुसार, ट्रेड मार्जिन रैशनलाइजेशन (टीएमआर) का मुख्य मकसद गलत तरीके से दवाएं बेचने की प्रथाओं को रोकना है। अमूमन देखा जाता है कि कारोबारियों का जोर ज्यादा मार्जिन वाली दवाओं को बेचने पर अधिक रहता है। चूंकी कैंसर की दवाएं महंगी होती हैं, इसलिए उन पर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय करना जरूरी था।

इस कदम से कैंसर के मरीजों की सालाना लगभग 2500 करोड़ रुपये की बचत होगी। सुप्रीम कोर्ट ने भी पिछले महीने कैंसर दवाओं की बहुत ज्यादा बेतहाशा कीमतों पर गंभीर चिंता जताई थी। सभी दवाओं पर एक समान 16 प्रतिशत मार्जिन की वकालत करते हुए, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने सालिसिटर जनरल तुषार मेहता से इसे खुली लूट बताया था। उन्होंने कहा था कि कैंसर की दवा फुटकर दवा विक्रेताओं को 2,700 रुपये में सप्लाई की जाती है, फिर भी उसकी एमआरपी 27,000 रुपये है।

Tegs: #Cancer drugs to become cheaper; prices could drop by up to 70%; effective from October.

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