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वैज्ञानिक डॉ एमपी परमेश्वरन की स्मृति में बुंडू में श्रद्धांजलि सभा, ज्ञान विज्ञान की समीक्षा

प्रहरी संवाददाता/पेटरवार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में पेटरवार प्रखंड के बुंडू पंचायत सभागार में 6 सितंबर को वैज्ञानिक डॉ एमपी परमेश्वरन की स्मृति में परिचर्चा का आयोजन किया गया।

जानकारी के अनुसार ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड की बोकारो जिला इकाई के तत्वावधान में प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक एवं जन-विज्ञानी डॉ एम.पी. परमेश्वरन की स्मृति में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। साथ हीं ज्ञान विज्ञान समिति के कार्यों की समीक्षा की गयी।

इस अवसर पर आयोजित बैठक की अध्यक्षता समिति के उपाध्यक्ष पंकज कुमार सिन्हा ने की। मौके पर ज्ञान विज्ञान समिति झारखंड के प्रांतीय कोषाध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद ठाकुर ने कहा कि डॉ परमेश्वरन ने विज्ञान को केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे सामाजिक बदलाव और तार्किक चेतना का मजबूत माध्यम बनाया। उन्होंने देश में साक्षरता आंदोलन और जन-विज्ञान अभियानों को जो दिशा दी, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव मार्गदर्शक बनी रहेगी। कहा कि प्रख्यात परमाणु वैज्ञानिक के रूप में प्रतिष्ठित करियर होने के बावजूद परमेश्वरन ने अपना पूरा जीवन आम जनों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए समर्पित कर दिया।

समिति के उपाध्यक्ष पंकज कुमार सिन्हा ने डॉ परमेश्वरन के विचारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनका सपना ऐसे समाज का निर्माण करना था, जहां समता और वैज्ञानिक चेतना प्रत्येक देशवासी के जीवन का हिस्सा बने। उन्होंने विज्ञान के विचारों को सामाजिक बदलाव के लिए धरातल पर उतारने का कार्य किया। चमेली देवी ने कहा कि भारत का भविष्य का भारत अभियान के तहत पूरे जिले में 250 शिक्षा केंद्र खोले जाएंगे। इन केंद्रों के माध्यम से गांव एवं पंचायत के रहिवासी अपनी समस्याओं के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़े विषयों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

प्रत्येक शिक्षा केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी स्वयंसेवकों को दी जाएगी। अभियान को सफल बनाने के लिए 19 से 21 सितंबर तक राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की जाएगी, जिसमें सभी जिलों से रिसोर्स पर्सन भाग लेंगे। श्रद्धांजलि सभा में राजेश कुमार, वीरेंद्र कुमार ठाकुर, कृष्णानंद महतो, प्रमिला देवी, सुनीता देवी, पार्वती देवी, रमेश कुमार मुंडा, सागर महतो, चमेली देवी, महेश्वर गोराई सहित बड़ी संख्या में रहिवासी शामिल थे।

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