एस. पी. सक्सेना/बोकारो। मेरे पिता ने भी अपना पुरा जीवन क्षेत्र में जनसेवा की। उनके आशीर्वाद से मैंने भी बिरासत में मिली अपने पिता के कार्यों को संभाला और पिछले 35 वर्ष से क्षेत्र में जनसेवा से जुड़ा हूँ।
उक्त बाते बीते दिनों बोकारो जिला के हद में चौधरी टोला गोमिया रहिवासी सुंदर गोप ने कही। मुल रूप से जड़ी-बूटी से तैयार आयुर्वेद दवा के माध्यम से जनसेवा से जुड़े वैद्य सुंदर गोप ने बताया कि उनके यहां बोकारो जिला के अलावा हजारीबाग, चतरा, रामगढ़, गिरिडीह, धनबाद आदि जिलों से बड़ी संख्या में पीड़ित आकर अपना इलाज कराते हैं। कहा कि मरीजों की संख्या इतनी अधिक है कि वे बहुतो का इलाज भी नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि वे मुख्य रूप से जोड़ो का दर्द, दाद, खाज, गठिया, बात, साइटीका आदि का जड़ी-बूटीयों से इलाज करते हैं। कहा कि इलाज के क्रम में जब कोई मरीज उनके पास मिठाई लेकर आते हैं तो उन्हें काफी सुकून मिलता है। वे समझते है कि उनका प्रयास सफल रहा और किसी का कष्ट दुर हो गया।
सरल स्वभाव और मृदुभाषी वैद्य सुंदर गोप 81 वर्ष की उम्र में भी काफी फुर्तीले तथा अपने दायित्व के प्रति समर्पित रहते है। दो पुत्र, चार पुत्रीयों सहित पोते, पोती और नाती, नातिन से भरा पुरा परिवार के बावजूद उनके पास आज भी कोई दर्द से पीड़ित पहुंचता है तब वे अपने आप को रोक नहीं पाते और लग जाते है उस मरीज का कष्ट दुर करने में। उन्हें न तो किसी प्रकार अपना प्रचार-प्रसार की चाहत है और न हीं लोकप्रियता की सोंच। साधारण सा जीवन जीना उनकी शगल में शामिल है।
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