रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो में शिक्षकों के लिए कक्षा शिक्षण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग विषय पर एक दिवसीय क्षमता निर्माण कार्यक्रम (कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम- सीबीपी) का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 तथा राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2023 के अनुरूप आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों को कम्प्यूटेशनल थिंकिंग एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की अवधारणाओं को विभिन्न विषयों के शिक्षण में प्रभावी ढंग से शामिल करने के लिए आवश्यक शैक्षणिक रणनीतियों से सुसज्जित करना था। साथ ही छात्रों में तार्किक सोच, समस्या समाधान क्षमता, पैटर्न पहचानने की दक्षता तथा एआई के नैतिक एवं जिम्मेदार उपयोग की समझ विकसित करने पर विशेष बल दिया गया।

इस अवसर पर होली क्रॉस स्कूल बालिडीह के वरिष्ठ शिक्षक संजय कुमार सेनापति तथा एमजीएम हायर सेकेंडरी स्कूल बोकारो स्टील सिटी की वरिष्ठ शिक्षिका दिव्या पांडेय ने संसाधन व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में प्रशिक्षण प्रदान किया। सेनापति ने कहा कि शिक्षक केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण के महत्वपूर्ण सहभागी हैं। उन्होंने विद्यार्थियों के सामाजिक, नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास पर बल देते हुए कहा कि जब शिक्षा को रचनात्मक गतिविधियों और आनंददायक अनुभवों से जोड़ा जाता है, तब सीखना अधिक प्रभावी बन जाता है। उन्होंने शिक्षकों से तकनीक के प्रति जागरूक और दक्ष बनने का आह्वान किया, ताकि वे 21वीं सदी की कौशल-आधारित शिक्षा की आवश्यकताओं को प्रभावी ढंग से पूरा कर सकें।
दिव्या पांडेय ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में एआई की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पारंपरिक शिक्षण पद्धतियां अब तेजी से बदल रही हैं। कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के लिए विश्लेषणात्मक सोच, निर्णय लेने की क्षमता तथा जटिल समस्याओं के समाधान की योग्यता विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भारत में स्कूली शिक्षा में एआई का बढ़ता उपयोग भविष्य की शिक्षा प्रणाली को नई दिशा प्रदान करेगा।

विद्यालय के प्राचार्य डॉ ए. एस. गंगवार ने कहा कि क्षमता निर्माण कार्यक्रम शिक्षकों को शिक्षा जगत के नवीनतम परिवर्तनों और तकनीकी नवाचारों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मानवता के लिए अत्यंत प्रभावशाली तकनीक है, लेकिन इसका उपयोग सदैव जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई ने शिक्षा और आधुनिक जीवनशैली में क्रांतिकारी परिवर्तन किए हैं, लेकिन यदि इसका उपयोग नैतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं किया गया, तो यह मानव बुद्धिमत्ता के लिए गंभीर चुनौतियां भी उत्पन्न कर सकता है। कार्यक्रम में उपस्थित शिक्षकों ने सक्रिय सहभागिता निभाई तथा एआई आधारित शिक्षण, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और भविष्य की शिक्षा प्रणाली से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार-विमर्श किया।
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