अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर स्थित रेल मंडल कार्यालय से कुछ ही दूरी पर बीआरआई कार्यालय की ओर जाने वाली सड़क के पश्चिमी किनारे रेलवे आवासों के बीच स्थित दशको पुराना तालाब बदहाली का शिकार हो गया है। रेल प्रशासन की अनदेखी से कभी रहिवासियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा यह तालाब आज गंदगी, जलकुंभी और कचरे से पट गया है।
ज्ञात हो कि रेलवे तालाब गांधी चौक से डीआरएम कार्यालय जाने वाले मार्ग पर, बाएं मुड़ने वाली पहली सड़क पर स्थित है। मार्ग पर लगा निर्देशिका बोर्ड बताता है कि यह रास्ता बीआरआई कार्यालय, आरपीएफ बैरक, स्काउट एंड गाइड्स और हरिहरनाथ कॉलोनी की ओर जाता है। निर्देशिका से बाएं मुड़ते ही कुछ कदमों की दूरी पर रेलवे आवासों के बीच यह तालाब नजर आता है, जिसकी दुर्दशा साफ दिखती है।
शिशु संघ उच्चतर विद्यालय से सटे पश्चिम न्यू अधिकारी आवास मार्ग की ओर जाने वाली सड़क से भी इस तालाब को देखा जा सकता है। ठीक ब्लैक ब्यूटी पार्क के पूर्व दिशा में स्थित यह तालाब स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत के नारे को मुंह चिढ़ा रहा है। कभी आसपास की रेलवे कॉलोनियों और कार्यालयों से जुड़े परिवारों के लिए यह तफरीह का स्थल हुआ करता था। लेकिन आज नालों का गंदा पानी इसमें गिर रहा है। तालाब के चारों ओर बने पक्के चबूतरे और पैदल पथ झाड़-झंखाड़ और कूड़े से ढक गए हैं।

यहां चहारदीवारी तो है, लेकिन वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (पुल) और पुराने हस्तशिल्प कला केंद्र की ओर जाने के लिए एक छोटा रास्ता छोड़ा गया है। तालाब के पूरब और उत्तर में रेलवे आवास हैं, जिनकी शोभा कभी इस तालाब से बढ़ती थी। स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि तालाब के सड़े पानी से उठती दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप अब कॉलोनीवासियों के साथ-साथ इस मार्ग से गुजरने वाले रेलकर्मियों व आम रहिवासियों के लिए मुसीबत बन गया है। वैसे , इस संकड़े मार्ग से अब रेल ड्यूटी करने वाले का ही आवागमन होता है। उक्त तालाब जंगली जीव-जंतुओं का अड्डा बन चुका है। अक्सर आसपास सांप निकलते देखे जाते हैं।
स्थानीय रेल प्रशासन की इच्छाशक्ति से यह तालाब फिर निर्मल हो सकता है। इसके सौंदर्यीकरण के लिए मास्टर प्लान बनाकर काम करने की जरूरत है। स्थानीय रहिवासियों का मानना है कि यदि तालाब का उद्धार हो जाए, तो पूरे क्षेत्र की सुंदरता में चार चांद लग जाएंगे। रहिवासियों ने बताया कि रेलवे परिसर में स्थित तालाबों की सफाई और मरम्मत का कार्य मुख्य रूप से इंजीनियरिंग विभाग और पर्यावरण एवं गृह व्यवस्था विभाग का है। कहा कि इंजीनियरिंग विभाग पक्के घाटों की मरम्मत, जलकुंभी हटाने, ड्रेजिंग और संरचनात्मक सुधार का कार्य करता है।
कहा गया कि चिकित्सा विभाग भी पानी को कीटाणुरहित करने के लिए ब्लीचिंग पाउडर डालना, मच्छरों की रोकथाम के लिए फॉगिंग व दवा छिड़काव करता है। मुख्य स्वास्थ्य निरीक्षक इसकी निगरानी करते हैं। वरिष्ठ अनुभाग अभियंता (पुल) कार्यालय और हस्तशिल्प कला केंद्र के ठीक उत्तर में स्थित इस तालाब की ओर अब तक किसी का ध्यान नहीं गया है। रहिवासी मांग कर रहे हैं कि तालाब किनारे के चबूतरे को कचरे से मुक्त कराया जाए और इसके जीर्णोद्धार की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं। इस संबंध में सोनपुर रेल मंडल के पीआरआई राम प्रताप सिंह से संबंधित विभाग से जानकारी लेकर बताने के लिए कहा गया तो उन्होंने बताया कि भविष्य में इस तालाब के सौंदर्यीकरण का प्लान है।
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