एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार के मुजफ्फरपुर स्थित राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के 26वें स्थापना दिवस के अवसर पर 6 जून को पर्यावरणविद एवं लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान के संस्थापक सुरेश गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक लीचीपुरम: एक अनहद सृजन का लोकार्पण किया गया।
इस अवसर पर हॉर्टिकल्चर में गोल्डन रिवोल्यूशन के जनक माने जाने वाले डॉ एच. पी. सिंह ने उपरोक्त पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि लीची पर यह एक अत्यंत उत्कृष्ट और उपयोगी पुस्तक है। इसमें लीची की संस्कृति, साहित्य, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को समाहित करने के साथ-साथ वैज्ञानिक दृष्टिकोण को भी प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया। डॉ सिंह ने सुझाव दिया कि इस पुस्तक की सामग्री को यू-ट्यूब के माध्यम से भी उपलब्ध कराया जाए, ताकि आम किसान, बागवान और लीची प्रेमी इससे लाभान्वित हो सकें तथा लीची संबंधी ज्ञान अधिक व्यापक स्तर तक पहुँच सके।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने लीचीपुरम स्टॉल का भी निरीक्षण किया। स्टॉल पर प्रदर्शित रीता मोदी द्वारा तैयार विभिन्न लीची आधारित व्यंजनों, लीचीपुरम आर्ट तथा लकड़ी एवं मिट्टी से निर्मित लीची की आकर्षक कलाकृतियों की उन्होंने विशेष सराहना की। इस अवसर पर अभियान के आर्टिस्ट वर्षा सिंह, गौरव राज भी उपस्थित थे।
उन्होंने कहा कि लोकल प्राइड, ग्लोबल रिच के सपने को साकार करने की क्षमता इस अभियान में निहित है। यह अभियान केवल लीची के संरक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय संस्कृति, कला, उद्यमिता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई पहचान देने का कार्य कर रहा है। डॉ सिंह ने सुझाव दिया कि इस अभियान से अधिक से अधिक रहिवासी किसानों को जोड़ा जाए तथा लीची उत्पादकों, बागवानों और उद्योग से जुड़े हितधारकों के समन्वित विकास के लिए सरकार से लीची बोर्ड की स्थापना की मांग भी की जानी चाहिए।
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