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उद्योगपतियों के नाम जंगल, पेड़ लगाने के नाम पर भाजपा का दोहरा चरित्र-नायक

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। एक पेड़ माँ के नाम लगाने की अपील करने वाली दोहरा चरित्र के भाजपा बताए कि वर्ष 2014 से 2024 के बीच 1.73 लाख हेक्टेयर वन भूमि किसके नाम कर दी गई? उपरोक्त बाते 5 जून को झारखंड प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने विश्व पर्यावरण दिवस पर भाजपा का एक पेड़ माँ के नाम पौधा लगाने के अभियान पर कटाक्ष करते हुए कही।

उन्होंने साफ़ शब्दों में कहा कि एक पेड़ मां के नाम पर भाजपा पेड़ लगाने के नाम पर नौंटकी कर रही है। आज देश के सामने सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि एक तरफ पर्यावरण संरक्षण के नाम पर बड़े-बड़े भाजपा नेताओ द्वारा अभियान चलाए जा रहे हैं, दूसरी तरफ देश के जंगल लगातार सिकुड़ रहे हैं। संसद में प्रस्तुत सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014 से 2024 के बीच 1.73 लाख हेक्टेयर से अधिक वन भूमि को गैर-वन कार्यों के लिए डायवर्ट करने की अनुमति दी गई। इनमें खनन, औद्योगिक परियोजनाएं, सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्य शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संस्था के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2001 से 2024 के बीच भारत में 23 लाख हेक्टेयर से अधिक वृक्ष आवरण समाप्त हो गया है। एक पेड़ मां के नाम पर सिर्फ और सिर्फ भाजपा नौंटकी कर देश की जनमानस का आइ वास करने का कार्य कर रही है। नायक ने कहा कि यह केवल आंकड़ों का मामला नहीं है। इसके पीछे लाखों पेड़, हजारों वन्य जीव और जंगलों पर निर्भर करोड़ों देशवासियों का जीवन जुड़ा है। विशेषकर आदिवासी मूलवासी समाज, जिसका अस्तित्व ही जल, जंगल और जमीन से जुड़ा है।

कहा कि जब कोई जंगल कटता है, तो केवल पेड़ नहीं गिरते, बल्कि एक पूरी संस्कृति, परंपरा और जीवन पद्धति पर भी आघात होता है। सरकार का तर्क है कि विकास के लिए कुछ समझौते आवश्यक हैं, लेकिन प्रश्न है कि विकास किसके लिए? यदि विकास का लाभ कुछ चुनिंदा कॉरपोरेट घरानों तक सीमित रह जाए और उसकी कीमत आदिवासी, किसान और पर्यावरण चुकाएं, तो ऐसे विकास मॉडल पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। कहा कि कैमरे के सामने पौधारोपण और कैमरे के पीछे जंगलों के हस्तांतरण की नीति कांग्रेस को स्वीकार नहीं है। कांग्रेस पार्टी यह जानना चाहती है कि यदि हर देशवासी से एक पेड़ लगाने की अपेक्षा की जाती है, तो सरकार से एक जंगल बचाने की अपेक्षा क्यों नहीं की जा सकती?

नायक ने कहा छत्तीसगढ़ के हसदेव (छत्तीसगढ़), मध्य प्रदेश के महान, अरावली, असम के देहिंग पटकाई से लेकर कर्नाटक, हिमाचल और ग्रेट निकोबार तक जंगलों पर लगातार बढ़ते दबाव के बीच भाजपा पर्यावरण संरक्षण का दावा कर रही है। कहा कि पर्यावरण केवल पौधारोपण का विषय नहीं है। यह नदियों, पहाड़ों, जंगलों, वन्य जीवों और उन करोड़ों देशवासियों का सवाल है जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीवन जीते हैं।

यदि हम वास्तव में पर्यावरण बचाना चाहते हैं, तो हमें प्रतीकात्मक अभियानों से आगे बढ़कर जंगलों की रक्षा करनी होगी, आदिवासियों के अधिकारों का सम्मान करना होगा और प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन पर रोक लगानी होगी। कहा कि आज आवश्यकता इस बात की है कि सरकार देश के सामने स्पष्ट करे कि पिछले दस वर्षों में कितनी वन भूमि उद्योगों को दी गई, कितने पेड़ काटे गए, कितने परिवार विस्थापित हुए और पर्यावरणीय क्षति की भरपाई के लिए क्या कदम उठाए गए। केवल पौधे लगाने की तस्वीरें दिखाने से यह प्रश्न समाप्त नहीं होंगे।

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