जलवायु-परिवर्तन एवं आपदाओं से बचाव के लिए लगाएं अधिक पौधे-प्राचार्य
रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। पेड़-पौधे केवल हमारे आपदा-रक्षक ही नहीं, बल्कि इस वसुंधरा के वास्तविक आभूषण भी हैं। ये जलवायु परिवर्तन के खिलाफ अग्रिम पंक्ति के योद्धा की भूमिका निभाते हैं। वर्तमान समय में हम तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि, भीषण आंधी-तूफान और वज्रपात जैसी अनेक गंभीर प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं, उनसे जीव-जगत की रक्षा का एकमात्र और अचूक उपाय अधिकाधिक पौधारोपण ही है।
यदि हमें सच्चे अर्थों में पर्यावरण-मित्र होने का परिचय देना है, तो सिर्फ किसी एक विशेष दिन नहीं, बल्कि वर्ष के हर दिन कुदरत की रक्षा के लिए संकल्पित होना होगा। उक्त बाते दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस) बोकारो के प्राचार्य डॉ ए. एस. गंगवार ने कही। अवसर था 5 जून को विद्यालय परिसर में विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य पर आयोजित सघन पौधारोपण अभियान का, जहां प्रकृति से प्रेरित, जलवायु के लिए, हमारे भविष्य के लिए की प्रगतिशील थीम के तहत पर्यावरण संरक्षण का पुनः शंखनाद किया गया।
प्राचार्य डॉ गंगवार के नेतृत्व और विद्यालय के गो ग्रीन इनिशिएटिव के तहत आयोजित इस अभियान में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षकों, प्रशासनिक पदाधिकारियों और भारी संख्या में विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। इस सामूहिक प्रयास के तहत विद्यालय परिसर के विभिन्न हिस्सों में दर्जनों पौधे लगाए गए।
प्राचार्य ने बताया कि डीपीएस बोकारो अपनी हरीतिमा-रक्षा की कटिबद्धता के तहत लगातार नवाचार कर रहा है। यहां विद्यार्थियों को पारंपरिक पठन-पाठन के साथ-साथ व्यावहारिक हरित-कार्यों से भी गहराई से जोड़ा जाता है, जिसके अंतर्गत बच्चे विभिन्न महत्वपूर्ण अवसरों पर देश के महापुरुषों के नाम पर पौधे लगाते हैं। उन्होंने कहा कि यहां कागज की बर्बादी रोकने के लिए एक पेपर रीसाइक्लिंग यूनिट संचालित है, जो बेकार कागजों को पुनः इस्तेमाल के योग्य बनाती है। इसके अलावा, ऊर्जा-संरक्षण के लिए कैंपस में 125 केवीए क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र लगाया गया है। विद्यालय की अनूठी परंपरा के तहत यहां अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ की बजाय पौधों से किया जाता है और समारोहों में फल-सब्जियों के बीजों से युक्त पहचान पत्र सौंपे जाते हैं।
इनके अलावा विद्यालय परिसर में चरक वाटिका, जैव हरित वाटिका, वर्मी कंपोस्ट फार्मिंग, उन्नत बागवानी, रेन वाटर हार्वेस्टिंग, सेव सॉइल अभियान और फुलवारी जैसी गतिविधियां इस गो ग्रीन इनिशिएटिव को और अधिक सशक्त बनाती हैं। पर्यावरण-संरक्षण के इन्हीं निरंतर और वैज्ञानिक प्रयासों का परिणाम रहा है कि डीपीएस बोकारो को अब तक तीन बार राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर प्रतिष्ठित ग्रीन स्कूल के खिताब से नवाजा जा चुका है।
मौके पर विद्यालय के वरीय उप प्राचार्य अंजनी भूषण, उप प्राचार्या शालिनी शर्मा, हेडमिस्ट्रेस सुनीता भारद्वाज, ममता त्रिपाठी, डॉ सरिता गंगवार व प्रीति सिन्हा, प्रशासक राजन कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी एवं विद्यालय कर्मी मौजूद रहे।
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