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मुंद्रा पोर्ट बना ड्रग्स सिंडिकेट का नया हब? 5वीं बार करोड़ों की खेप बरामद

भाजपा–अदानी गठजोड़ कटघरे में, देश की जनता जवाब मांग रही है

एस.पी.सक्सेना (झारखण्ड) झारखंड प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता विजय शंकर नायक ने 31 मई को कहा है कि गुजरात का मुंद्रा पोर्ट एक बार फिर देश और दुनिया के सामने गंभीर सवालों के केंद्र में है। उन्होंने कहा कि बीते 25-26 मई को मुंद्रा के पास लगभग 115 किलो कोकीन, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग ₹1150 करोड़ बताई जा रही है, बरामद की गई। यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार सामने आ रही घटनाओं की एक और कड़ी है।

नायक ने कहा कि इससे यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर मुंद्रा पोर्ट व्यापार का केंद्र है या अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट का नया सुरक्षित हब बन चुका है? उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार नशा मुक्त भारत का नारा देती है, लेकिन हकीकत यह है कि देश के सबसे चर्चित निजी बंदरगाहों में से एक मुंद्रा पोर्ट पर बार-बार हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स पकड़ी जा रही है। नायक ने उदाहरण देते हुए कहा कि सितंबर 2021 में मुंद्रा पोर्ट पर लगभग 2988 किलो हेरोइन बरामद की गयी थी, जिसकी कीमत हजारों करोड़ रुपये आंकी गई थी और जिसका संबंध अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क तथा आतंकवाद वित्तपोषण से भी जोड़ा गया था। इसके बाद वर्ष 2022 में 75 किलो से अधिक हेरोइन और अन्य मादक पदार्थ जब्त किए गए। वर्ष 2024 में सीएफएस मुंद्रा से 94 लाख से अधिक ट्रामाडोल टैबलेट्स की दो बड़ी खेपें पकड़ी गईं।

नायक ने कहा कि संसदीय आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2021 से 2025 के बीच गुजरात के बड़े बंदरगाहों से जुड़े ड्रग्स मामलों में सबसे अधिक मामले मुंद्रा पोर्ट से जुड़े पाए गए। उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि 2021 में इतनी बड़ी हेरोइन खेप पकड़े जाने के बाद भाजपा सरकार ने दावा किया था कि सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह मजबूत कर दिया गया है। यदि सुरक्षा इतनी मजबूत थी, तो फिर 2022, 2024 और अब 2026 में हजारों करोड़ रुपये की ड्रग्स आखिर देश में कैसे प्रवेश कर गई? क्या मुंद्रा पोर्ट की सुरक्षा केवल कागजों पर है? या फिर ड्रग्स तस्करों को राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है?

नायक ने कहा कि छोटे-छोटे मामलों में मीडिया ट्रायल करने वाली भाजपा सरकार और उसकी एजेंसियां इन बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स नेटवर्क पर रहस्यमयी चुप्पी क्यों साध लेती हैं? आखिर गुजरात ही बार-बार अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करों का प्रवेश द्वार क्यों बन रहा है? यह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देश के युवाओं के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न है।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश के युवाओं को नशे के दलदल में धकेलने वाली शक्तियों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करने के बजाय भाजपा सरकार और अदानी प्रबंधन लगातार चुप्पी साधे है। करोड़ों रुपये की ड्रग्स बार-बार मुंद्रा पोर्ट पर मिलना और सरकार का मौन रहना अत्यंत चिंताजनक तथा संदेह पैदा करने वाला है।

कांग्रेस पार्टी की ओर से प्रदेश प्रवक्ता नायक ने मांग की है कि मुंद्रा पोर्ट से जुड़े सभी ड्रग्स मामलों की उच्चस्तरीय एसआईटी अथवा न्यायिक जांच कराई जाए। वर्ष 2021 से 2026 तक दर्ज सभी मामलों की प्रगति रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। पोर्ट सुरक्षा व्यवस्था की स्वतंत्र और निष्पक्ष ऑडिट कराई जाए। ड्रग्स तस्करी में शामिल या संरक्षण देने वाले अधिकारियों एवं राजनीतिक तत्वों पर कठोर कार्रवाई हो। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर केंद्र सरकार देश की जनता को स्पष्ट जवाब दे।

नायक ने कहा कि देश की जनता को यह जानने का पूरा अधिकार है कि आखिर मुंद्रा पोर्ट पर वास्तविक व्यापार हो रहा है या देश के युवाओं को नशे की गिरफ्त में धकेलने की साजिश संचालित की जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
अंत में उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार और अदानी प्रबंधन अब चुप्पी तोड़ें और देश की जनता को जवाब दें कि आखिर क्यों मुंद्रा पोर्ट बार-बार ड्रग्स तस्करों के सबसे सुरक्षित कॉरिडोर के रूप में सामने आ रहा है।

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