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सबलपुर संगम क्षेत्र बना आध्यात्मिक चेतना का केंद्र, संगम धाम को मिलेगा गौरव

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में हरिहर क्षेत्र सोनपुर के सबलपुर कचहरी बाजार स्थित ए सेंट्रल इंग्लिश स्कूल में 14 मई को एक ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गयी। बैठक में संत-महात्माओं, बिहार सिख समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों, मातृशक्ति, समाजसेवियों एवं साहित्यकारों ने मिलकर गंगा-गंडकी संगम क्षेत्र के आध्यात्मिक पुनर्जागरण का सामूहिक संकल्प लिया।

बैठक की अध्यक्षता साहित्यकार माधव प्रसाद राय और संचालन प्राचार्य अनिल कुमार ने किया। इस अवसर पर हिंदू जागरण मंच के बिहार-झारखंड क्षेत्र संयोजक विनोद कुमार सिंह यादव ने कहा कि प्रभास, भृगु और वाराह क्षेत्र की भांति श्रीहरिहर क्षेत्र भी सप्त तीर्थ क्षेत्रों में से एक है। तिब्बत से पूर्वांचल तक फैले इस क्षेत्र का केंद्र पवित्र गंगा-गंडकी का संगम है, जिसके एक तट पर बाबा हरिहरनाथ मंदिर और दूसरे तट पर मोक्षभूमि कौनहारा घाट स्थित है।

उन्होंने बताया कि सबलपुर स्थित यह संगम स्थल सदियों से विश्वभर के साधकों को आकर्षित करता रहा है। पटियाला राजघराने के एक युवराज ने यहीं तपस्या कर संगम की रेती में जीवित समाधि ली थी। यह क्षेत्र गोरखनाथ परंपरा सहित अनेक संतों की तपोभूमि रहा है। कहा कि स्थानीय ग्रामवासियों ने योगीराज गोरखाई नाथजी की समाधि पर भव्य मंदिर का निर्माण कराया है।

उन्होंने कहा कि महाभारत-पुराणों में वर्णित यह स्थान कभी गंगा, गंडकी, मही, सोन व पुनपुन नदियों के कारण पंचनंद या पंचवेणी संगम कहलाता था। मान्यता है कि यहां दर्शन-स्नान से मोक्ष की प्राप्ति होती है। हाल ही में ड्रोन से संगम के दिव्य दृश्य का फिल्मांकन कर व्यापक प्रचार किया जा रहा है।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद की नई लहर

बैठक में कहा गया कि देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद और लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल द्वारा सोमनाथ जीर्णोद्धार से शुरू हुए सांस्कृतिक नवजागरण के क्रम में पिछले 15 वर्षों से हरिहर क्षेत्र का भी पुनरुत्थान हो रहा है। हरिहरनाथ-मुक्तिनाथ यात्रा, दीपोत्सव, पंचकोसी, 14 कोसी, 84 कोसी परिक्रमा व मसान होली जैसे आयोजनों ने क्षेत्र को नई पहचान दी है। कहा गया कि विदेशी आक्रमणों के काल में भी यहां के ऋषि-मुनियों ने संस्कृति की रक्षा हेतु संघर्ष किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि संत शिरोमणि विष्णुदास उदासीन उर्फ मौनी बाबा, अयोध्या के डॉ दामोदर दासजी, पटना साहिब के सरदार महेन्द्र सिंह ढिल्लन, आर्य समाज दिल्ली के स्वामी ब्रह्मानंदजी, इस्कॉन पटना के सीता रामेश्वर दासजी महाराज सहित अनेक संतों ने अपने विचार व्यक्त कर सबलपुर संगम धाम की महिमा का गायन किया और स्थानीय जनता को जागरूक किया।

मौके पर बाबा हरिहरनाथ मंदिर, कौनहारा घाट, जड़ भरत आश्रम, रामचौरा धाम, योगीराज गोरखाई नाथ शिवशक्ति मंदिर जैसे सिद्ध स्थलों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि यहां करपात्रीजी महाराज, पशुपतिनाथ बाबा, संत नारायण दास, सिद्ध संत रामलखन दासजी, वेदांती स्वामी जैसे महापुरुष पधार चुके हैं। जगद्गुरु रामानुजाचार्य लक्ष्मणाचार्यजी, स्वामी धरणीधरजी, संत रमाशंकर शास्त्री व कबीर मठ के आचार्य रविंद्र दास ब्रह्मचारी के योगदान को भी स्मरण किया गया।

बैठक के अंत में संगम क्षेत्र के संरक्षण, विकास और इसके आध्यात्मिक-सांस्कृतिक महत्व के व्यापक प्रचार-प्रसार का सामूहिक संकल्प लिया गया। कहा गया कि लंबे समय से बाधित संगम स्नान की व्यवस्था अब ग्रामवासियों व संतों के सहयोग से पुनः सुदृढ़ की जा रही है। कार्यक्रम को सफल बनाने में विनोद राय, मिलन कुमार, दीपक कुमार, शिक्षक सुनील कुमार, रंजीत राय, डॉ त्रिभुवन झा, सरपंच भरत सिंह सहित अनेक स्थानीय कार्यकर्ताओं का सराहनीय योगदान रहा।

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