रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में चास अंचल के तेतुलिया मौजा की वन विभाग की जमीन को गलत तरीके से बंदोबस्त कर खरीद-बिक्री किए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में तत्कालीन डीएफओ रजनीश कुमार द्वारा न्यायालय में मामला दर्ज कराए जाने के बाद प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई थी।
बताया जाता है कि चास अंचल के उक्त वन भूमि को अवैध तरीके से बंदोबस्त कर निजी हाथों के नाम हस्तांतरित किए जाने की शिकायत लंबे समय से उठती रही थी। सूत्रों के अनुसार तत्कालीन वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) रजनीश कुमार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित दस्तावेजों की जांच कर न्यायालय की शरण ली थी। उनके इस कदम के बाद मामले में लिप्त तत्वों में हड़कंप मच गया था। हालांकि बाद में उनका स्थानांतरण कर दिया गया, लेकिन अब यह मामला फिर सुर्खियों में है।
स्थानीय रहिवासियों का कहना है कि सच आखिरकार सामने आ ही जाता है और वन भूमि की सुरक्षा को लेकर उठाए गए कदम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वन बचाओ समिति के केंद्रीय उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने तत्कालीन डीएफओ रजनीश कुमार की कार्रवाई की सराहना करते हुए 11 मई को कहा कि बोकारो जिले में बड़े पैमाने पर वन भूमि को गलत तरीके से बंदोबस्त कर कब्जा और खरीद-बिक्री की गई है। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए तथा जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध हो, उन पर सख्त कार्रवाई की जाए।
उन्होंने मांग करते हुए कहा कि जिले में जितनी भी वन भूमि को नियम विरुद्ध बंदोबस्त किया गया है, उसे तत्काल निरस्त किया जाए। साथ ही संबंधित अंचल अधिकारियों, कर्मचारियों एवं अन्य दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके। महतो ने कहा कि वन भूमि केवल सरकारी संपत्ति नहीं बल्कि पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। यदि समय रहते ऐसे मामलों पर रोक नहीं लगी तो जंगल और पर्यावरण दोनों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने राज्य सरकार से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
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