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प्रेमचंद रंगशाला में 10वां बाल रंग महोत्सव के तीसरे और अंतिम समूह गायन

एस. पी. सक्सेना/पटना (बिहार)। सबेरा कला केंद्र एवं संस्कार भारती द्वारा तीन दिवसीय 10वां बाल रंग महोत्सव 2025-26 के तीसरे दिन की शुरुआत 5 मई को बिहार की राजधानी पटना के प्रेमचंद रंगशाला में त्रिवेणी कला केंद्र के बच्चों द्वारा समूह गायन से किया गया। यहां अदविक प्रकाश द्वारा गुड़िया नृत्य का एकल प्रदर्शन किया गया।

समापन दिवस पर द कोरियोग्राफर पटना के बच्चों द्वारा बंदे मातरम पर आकर्षक नृत्य प्रस्तुत किया गया। रंगमार्च पटना द्वारा क्लासिकल नृत्य से दर्शकों का मन मोह लिया। जानकारी देते हुए कलाकार साझा संघ के सचिव मनीष महीवाल ने कहा कि लोक पंच पटना द्वारा लोक नृत्य की प्रस्तुति की गई। इस नृत्य ने दर्शको को भाव विभोर कर दिया। अंतिम प्रस्तुति किलकारी बाल भवन पटना द्वारा नाटक गोपी गवैया बाघा बजैया अभिषेक राज़ के निर्देशन में मंचित किया गया। जिसके कथासार इस प्रकार है कि नाटक की कहानी दो सरल स्वभाव के कलाकारों गोपी और बाघा के इर्द-गिर्द घूमती है। गोपी को गाने का शौक है और बाघा को वादन का, लेकिन उनके गाँववाले उनके इस शौक से तंग आकर उन्हें राजा के पास भेज देते हैं। राजा उनका गाना सुनकर उन्हें गधे पर बैठाकर गाँव से निकलवा देता है।

परेशान होकर दोनों जंगल में शरण लेते हैं, जहाँ उनकी पहली मुलाकात होती है। यही मुलाकात गहरी दोस्ती में बदल जाती है। आगे चलकर उनकी मुलाकात भूतों की रानी से होती है और इसके बाद शुरू होता है मज़ेदार व हैरतअंगेज़ घटनाओं का सिलसिला, जो दर्शकों को हँसी और रोमांच से भर देता है। बाल कलाकारों ने अपने सजीव अभिनय, सशक्त संवाद अदायगी और ऊर्जा से भरपूर मंचीय प्रस्तुति के माध्यम से नाटक को जीवंत बना दिया।

हास्य और संगीत से भरपूर इस नाटक ने सभी आयु वर्ग के दर्शकों को अंत तक बांधे रखा। नाटक की संगीत परिकल्पना एवं निर्देशन किलकारी के नाट्य प्रशिक्षक अभिषेक राज द्वारा किया गया। नाटक में शुभम, विशाल, सूरज, अनीश, जीतू, हर्ष, कोमल, मोनू, सोनू, रौशन, निखिल, तेजस, रागिनी, निशा, अमिता, आरना, श्रेया, शिवांगी आदि कलाकारों ने अभिनय किया।

कार्यक्रम में उपस्थित दर्शकों, अभिभावकों एवं कला प्रेमियों ने किलकारी के बच्चों की प्रतिभा की प्रशंसा की। कार्यक्रम का संचालन नेहाल कुमार सिंह निर्मल ने किया। भारतेंदु सिंह चौहान के नेतृत्व में महोत्सव सफलता पुर्वक सम्पन्न हो गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में विनोद अनुपम (राष्ट्रीय फिल्म समीक्षक) एवं कृति आलोक (जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी) उपस्थित रहे।

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