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उत्पादन से सतत विकास तक सीसीएल बरका-सयाल क्षेत्र ने रचा नया इतिहास

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। महारत्न कंपनी कोल इंडिया लिमिटेड की अनुशंगी सीसीएल का बरका-सयाल क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में नया इतिहास रचा है। क्षेत्र ने उत्पादन से लेकर सतत विकास तक हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है।

सीसीएल के जनसंपर्क विभाग द्वारा 14 अप्रैल को जारी विज्ञप्ति के अनुसार सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के बरका-सयाल क्षेत्र ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपने स्थापना काल से अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कोयला उत्पादन, अधिभार (ओबीआर) निष्पादन और रैक डिस्पैच सहित अन्य मामलों में नई ऊँचाइयाँ हासिल की हैं। बताया गया कि वित्तीय वर्ष-2025-26 में क्षेत्र का कोयला उत्पादन 87.43 लाख टन रहा, जो प्राप्त लक्ष्य का 97 प्रतिशत है तथा पिछले वर्ष का उत्पादन 81 लाख टन की तुलना में 8 प्रतिशत वृद्धि दर्शाता है।

बताया गया कि इसी प्रकार बरका-सयाल क्षेत्र द्वारा ओबीआर 236.79 लाख क्यूबिक मीटर रहा, जो लक्ष्य का 146 प्रतिशत है और इसमें 38 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं कंपोजिट उत्पादन 292.75 लाख क्यूबिक मीटर (133 प्रतिशत) तथा डिस्पैच 80.4 लाख टन (5 प्रतिशत वृद्धि) रहा। कुल 2063 रैक डिस्पैच दर्ज किए गए, जो पिछले वर्ष 1725 की तुलना में 20 प्रतिशत अधिक है।

यह उल्लेखनीय उपलब्धि बरका-सयाल क्षेत्र के श्रमिकों के अथक परिश्रम, उनके समर्पण और प्रबंधन की दूरदर्शी योजना एवं सुदृढ़ कार्यनिष्ठा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। विभाग के अनुसार बरका-सयाल क्षेत्र ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 16.2 मिलियन क्यूबिक मीटर ओबी हटाने के वार्षिक लक्ष्य को 16 दिसंबर, 2025 को ही 105 दिन पहले प्राप्त कर लिया था। कहा गया कि क्षेत्र द्वारा 14 दिसंबर 2025 को एक दिन में 1.0 लाख क्यूबिक मीटर ओबी हटाने का रिकॉर्ड भी स्थापित किया गया, जो स्थापना काल से अब तक का सर्वोच्च प्रदर्शन है।

कहा गया कि बरका-सयाल क्षेत्र के नॉर्थ उरीमारी कोल हैंडलिंग परियोजना एसआईलओ जो सीसीएल का एकमात्र परिचालित एफएमसी प्रोजेक्ट है, ने भी उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। वित्तीय वर्ष 25-26 में यहां डिस्पैच 47.02 लाख टन रहा, जो पिछले वर्ष 29 लाख टन की तुलना में 62 प्रतिशत अधिक है। वहीं रैक की संख्या 1193 रही, जो 755 से बढ़कर 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है। वहीं क्षेत्र के बिरसा/नॉर्थ उरीमारी प्रोजेक्ट की ईसी/सीटीओ क्षमता 4.5 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष से बढ़ाकर 6 एमटी प्रतिवर्ष करना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही।

कहा गया कि सतत विकास की दिशा में भी बरका-सयाल क्षेत्र ने सराहनीय पहल की है। एफएमसी (CHP–SILO) के माध्यम से पर्यावरण-अनुकूल कोयला परिवहन को बढ़ावा देते हुए सड़क परिवहन और वाहन उत्सर्जन में कमी लाई गई है। क्षेत्र के बलकुदरा ओबी डंप पर इको-पार्क का निर्माण पूर्ण कर इसे एक हरित मनोरंजन स्थल के रूप में विकसित किया गया है, जो कर्मचारियों और स्थानीय रहिवासियों के लिए सुकून भरा वातावरण प्रदान करेगा। नॉर्थ उरीमारी सीएचपी-सिलो को झारखंड के पहले औपचारिक माइनिंग टूरिज्म केंद्र के रूप में विकसित किया गया है, जो झारखंड टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन झारखंड सरकार और सीसीएल के बीच हुए एमओयू के तहत स्थापित किया गया है।

यहां देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों का स्वागत किया जा रहा है, जिससे खनन क्षेत्र की नई पहचान बन रही है। इसके साथ ही, क्षेत्र के सौंदा बी साइडिंग के समीप झारखंड सरकार की मत्स्य पालन परियोजना में सक्रिय सहयोग करते हुए औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन , आजीविका और महिला सशक्तिकरण को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।

इसी क्रम में क्षेत्र में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों की दिशा में 5 मेगावाट सौर ऊर्जा संयंत्र, बलकुदरा में सफलतापूर्वक स्थापित कर ग्रिड से जोड़ा गया है, जो हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सीएसआर के तहत हजारीबाग जिला के हद में उरीमारी पंचायत तथा बड़कागांव में 2 अमृत सरोवर परियोजनाओं का सफल निर्माण किया गया है, जो जल संरक्षण और सामुदायिक विकास का उत्कृष्ट उदाहरण है।

जनसंपर्क विभाग के अनुसार सीसीएल के सीएमडी निलेंदु कुमार सिंह के नेतृत्व में बरका-सयाल क्षेत्र ने न केवल उत्पादन के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण, सामुदायिक विकास और सतत भविष्य की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाए हैं। यह उपलब्धियां दर्शाती हैं कि जब श्रमिकों का समर्पण, प्रबंधन की दूरदर्शिता और टीम भावना एक साथ आगे बढ़ती है, तो विकास की राह और भी सशक्त हो जाती है।

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