सनातन धर्म प्रचार व् भारत-नेपाल के संबंधों को मिलेगी नई मजबूती
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। पौराणिक काल से चली आ रही भारत और नेपाल के बीच सामाजिक समरसता और सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार का प्रतीक सारण जिला के हद में सोनपुर के हरिहरनाथ से नेपाल के मुक्तिनाथ यात्रा का 14 अप्रैल की सुबह भव्य शुभारंभ किया गया।
जानकारी के अनुसार सोनपुर के संकट मोचन मंदिर एवं बाबा हरिहरनाथ मंदिर के मुख्य द्वार पर धर्मजागरण समन्वय के क्षेत्र प्रमुख सुबेदारजी ने भगवा झंडा दिखाकर यात्रियों को गंतव्य के लिए रवाना किया। यात्रा को प्रस्थान कराते हुए प्रमुख सुबेदारजी ने कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी के प्राचीन संबंधों को और अधिक सशक्त करना है। उन्होंने सुरक्षा के दृष्टिकोण पर जोर देते हुए कहा कि मुक्तिनाथ क्षेत्र चीन सीमा के समीप स्थित है, जिस पर पड़ोसी देशों की विस्तारवादी नजर रहती है। ऐसे में सनातन धर्म के माध्यम से सांस्कृतिक चेतना जगाकर इस पवित्र क्षेत्र की रक्षा करना अनिवार्य है।
विभिन्न स्थानों पर होगी धर्म सभाएं
मुक्तिनाथ यात्रा के महासचिव डॉ आशुतोष कुमार ने बताया कि सोनपुर से मुक्तिनाथ जाने के मार्ग में विभिन्न पड़ावों पर धर्मसभाओं का आयोजन किया जाएगा। इन सभाओं में देश-विदेश से आए प्रतिष्ठित साधु-संतों के मुखारविंद से सनातन धर्म की महिमा सुनने का अवसर मिलेगा। यात्रा के संयोजक अजित सिंह ने इसे सभी सनातनी हिंदुओं के लिए सौभाग्य की बात बताया।
ज्ञात हो कि यह यात्रा सोनपुर से प्रारंभ होकर हाजीपुर (हरौली), लालगंज, वैशाली, पारु, साहेबगंज, केसरिया, संग्रामपुर, अरेराज, बगहा, बेतिया, वाल्मीकिनगर, त्रिवेणी (नेपाल), कावासोती नारायण घाट, पोखरा, जोमसोम से मुक्तिनाथ पहुंचकर विश्राम करेगी।
यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर बिहार सांस्कृतिक विकास परिषद के अध्यक्ष विनोद सम्राट, योग गुरु प्राण देवजी, धर्म जागरण समन्वय के पूर्णकालिक प्रमुख रविदासजी, यात्रा महासचिव डॉ रिंकी कुमारी, प्रान्त संयोजक विजय यादव, सह-संयोजक अरुण सिन्हा, प्रशांत विक्रम और आरएसएस के कार्यालय प्रमुख देवेंद्र सहित सैकड़ों श्रद्धालु और साधु-संत उपस्थित रहे।
पौराणिक यात्रा का प्रतीक हरिहरनाथ-मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा-कोयला राज्यमंत्री
केन्द्रीय खनन एवं कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बीते 13 अप्रैल को यहां कहा कि यह यात्रा भारत और नेपाल के सांस्कृतिक एवं पौराणिक यात्रा है। क्योंकि नेपाल और भारत का पूर्व से अच्छा संबंध रहा है, जिसके कारण इस यात्रा का शुभारंभ किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का सांस्कृतिक सभ्यता समाजिक समरसता बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि नेपाल और भारत के बीच अन्योन्याश्रय संबंध है।दोनों ही देश हिंदुओं और बौद्धों के लिए नमनीय है।

मौके पर संजय सरावगी (प्रदेश अध्यक्ष), जगन्नाथ सिंह (कनिष्ठ अभियंता, पटना उच्च न्यायालय), प्रोफेसर डॉ राजेंद्र प्रसाद गुप्ता (उपनेता, बिहार विधान परिषद), संतोष सिंह (पूर्व मंत्री, बिहार सरकार एवं सदस्य, बिहार विधान परिषद), अरुणेश मेहरा (पूर्व मंत्री एवं विधायक, अमनौर), अवधेश सिंह (विधायक, हाजीपुर), छोटी कुमारी (विधायक, छपरा) सहित अन्य प्रमुख शामिल रहे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में अभिमन्यु सिंह (राज्य संयोजक), विनोद सिंह सम्राट (बिहार सांस्कृतिक विकास परिषद), अजीत कुमार (यात्रा आयोजन समिति संयोजक), ज्ञानेन्द्र सिंह टुनटुन (कार्यक्रम समन्वयक), राकेश सिंह टिंकू (सांसद प्रतिनिधि), प्रमोद कुमार सिंह (बबलू जी), राजेश कुमार सिंह (जिला सह संयोजक), विजय यादव (प्रांत संयोजक), अभिषेक कुमार सिंह (कार्यक्रम संयोजक) की महती भूमिका रही।
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