अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। आस्था, परंपरा और भारत-नेपाल की अटूट सांस्कृतिक विरासत का जीवंत संगम 13 अप्रैल को सारण जिला के हद में सोनपुर की पावन धरती पर उतरने जा रहा है। हरिहरनाथ-मुक्तिनाथ सांस्कृतिक यात्रा 2026 के शुभारंभ पर काली घाट के तट एक ओर जहां वेद मंत्रों से गुंजायमान होंगे, वहीं दूसरी ओर भक्ति और उल्लास का एक नया अध्याय लिखा जाएगा।
इस भव्य आयोजन के लिए सारण जिला के हद में मुक्तिधाम सोनपुर को दुल्हन की तरह सजाया गया है। जगह-जगह लगे तोरण द्वार और उमड़ता जन सैलाब साधु-संतों के स्वागत के लिए पलकें बिछाए खड़ा है।
यह यात्रा केवल एक धार्मिक भ्रमण नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक प्रदीप्त दीप है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की धर्म जागरण समन्वय गतिविधि के क्षेत्र प्रमुख सुबेदार सिंह की प्रेरणा से वर्ष 2011 में शुरू की गयी यह यात्रा आज एक विशाल वटवृक्ष का रूप ले चुकी है। इसका मूल उद्देश्य प्राचीन आध्यात्मिक मान्यताओं को जन-जन तक पहुंचाना और नेपाल-भारत के रोटी-बेटी व भक्ति के संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ करना है। ऐसी ही पौराणिक कथाओं की साक्षी बनेगी नारायणी गंडकी।
शालिग्रामी और काली गंडकी विभिन्न नामों से पूजी जाने वाली मां नारायणी का आंचल भगवान शालिग्राम की महिमा से मंडित है। नेपाल के मुक्तिनाथ से उद्गमित होकर सोनपुर के गंगा-गंडकी संगम तक बहने वाली यह जलधारा द्वापर युग के गज-ग्राह युद्ध की मुक्तिगाथा की साक्षी है। इसी पावन संगम पर बाबा हरिहरनाथ का सान्निध्य श्रद्धालुओं को असीम शांति की अनुभूति कराता है।
सोनपुर के काली घाट पर सजेगी देवलोक जैसी छटा
इस अध्यात्म यात्रा के महासचिव डॉ आशुतोष कुमार ने 12 अप्रैल को बताया कि 13 अप्रैल की शाम सोनपुर के लिए ऐतिहासिक होगी। शाम 4 बजे स्थानीय और सांस्कृतिक दलों द्वारा भव्य कलात्मक प्रस्तुतियां देखने लायक होगी। विद्वानों और संतों द्वारा धर्म व अध्यात्म पर अमृत वर्षा होगी। कहा कि संध्या बेला में दीपों की लौ से जगमगाता सोनपुर का काली घाट, जहां दिव्य महाआरती आकर्षण का केंद्र होगी।
उन्होंने कहा कि इस पुनीत अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में बिहार भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी उपस्थित रहेंगे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व सांसद गोपाल नारायण सिंह करेंगे। कहा कि आरएसएस के क्षेत्र प्रचारक रामनवमीजी, क्षेत्र कार्यवाह मोहन सिंहजी और प्रांत प्रचारक रविशंकरजी का मार्गदर्शन प्राप्त होगा। इसके अलावा अन्य उपस्थित होनेवाले अतिथियों में केंद्रीय मंत्री सतीश चन्द्र दूबे सहित बिहार सरकार के कई विधायक और विधान पार्षद इस गरिमामयी क्षण के साक्षी बनेंगे।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा श्रीगजेन्द्र मोक्ष देवस्थानम दिव्य देश पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी लक्ष्मणाचार्यजी महाराज, लोक सेवा आश्रम (श्रीसूर्य एवं शनि मंदिर) के महंत संत विष्णु दास उदासीन उर्फ मौनी बाबा और महामंडलेश्वर शिवेश्वर महादेव भारतीजी सहित देश के प्रख्यात संत अपने आशीष वचनों से श्रद्धालुओं को कृतार्थ करेंगे।
मुक्तिनाथ तक भक्ति का सफर
ज्ञात हो कि सोनपुर से शुरू होकर यह यात्रा केशरिया, बेतिया, बगहा और वाल्मीकि नगर होते हुए नेपाल में प्रवेश करेगी। आगामी 18 अप्रैल को श्रद्धालु पवित्र मुक्तिनाथ धाम में भगवान के दर्शन करेंगे। वहीं 19 अप्रैल को समापन के साथ यह यात्रा सांस्कृतिक एकता का एक नया कीर्तिमान स्थापित कर संपन्न होगी। आयोजन समिति ने कहा है कि यह यात्रा हमारी जड़ों की ओर लौटने का आह्वान है। आइए, हम सभी सनातनी इस सांस्कृतिक महाकुंभ का हिस्सा बनें और अपनी समृद्ध विरासत पर गर्व करें।
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