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न्याय के नए मंदिर का मार्ग प्रशस्त: ₹38 करोड़ की अदालती परियोजना ने पकड़ी रफ्तार

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अनुमंडल व्यवहार न्यायालय के बहुप्रतीक्षित नए भवन के निर्माण पर मंडरा रहे अनिश्चितता के बादल छंट गए हैं। प्रशासनिक खींचतान और एक दिन के गतिरोध के बाद दूसरे दिन 11 अप्रैल से निर्माण स्थल पर मशीनों की गूंज और मजदूरों की सक्रियता फिर से लौट आई है।

न्याय के नये मंदिर अनुमंडल न्यायालय निर्माण को लेकर युद्धस्तर पर हो रही सफाई और जमीन के समतलीकरण ने यह साफ कर दिया है कि अब यह परियोजना बिना रुके आगे बढ़ेगी।

ज्ञात हो कि ​​बीते 10 अप्रैल को प्रशासन और सारण जिला परिषद के बीच कम्युनिकेशन गैप की वजह से निर्माण कार्य में बाधा आई थी। स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि जिला पार्षदों द्वारा तथ्यों की जांच किए बिना की गई बयानबाजी ने एक अनावश्यक विवाद को जन्म दिया। चूंकि यह मामला सीधे तौर पर न्यायिक ढांचे के सुदृढ़ीकरण से जुड़ा है, इसलिए प्रबुद्ध नागरिकों ने इसमें राजनीतिक हस्तक्षेप को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। वैसे, जिला परिषद् की ओर से कार्य प्रारंभ किए जाने के बाद कोई वक्तव्य नहीं आया है। इसके निर्माण में कुल लागत लगभग ₹38 करोड़ होने का अनुमान है।

ज्ञात हो कि व्यवहार न्यायालय के ठीक पश्चिम स्थित सरकारी भूमि पर नया व्यवहार न्यायालय का निर्माण होगा, जिसके लिए सफाई कार्य जारी है। इसी माह पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश द्वारा भूमि पूजन की संभावना है। इसका ​निर्माण कार्य पुनः प्रारंभ होने से अधिवक्ताओं और स्थानीय रहिवासियों में हर्ष का माहौल है।

अधिवक्ताओं का मानना है कि अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस नए भवन के बनने से न केवल न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी आएगी, बल्कि दूर-दराज से आने वाले वादकारियों को भी बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी।​ कहा गया कि न्यायालय निर्माण जैसा जनहित का कार्य राजनीति से ऊपर होना चाहिए। गतिरोध का समाप्त होना और कार्य की बहाली सोनपुर के विकास के लिए स्वागत योग्य कदम है।

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