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व्यवहार न्यायालय निर्माण पर रोक: जिला परिषद व् प्रशासन के बीच गहराया भूमि विवाद

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में सोनपुर अनुमंडल में लगभग 30 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले अनुमंडल व्यवहार न्यायालय के भवन निर्माण कार्य पर ग्रहण लग गया है।

जानकारी के अनुसार बीते 9 अप्रैल को सोनपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) स्निग्धा नेहा ने कार्यस्थल पर चल रहे सफाई कार्य को यह कहते हुए रुकवा दिया कि संबंधित भूमि जिला परिषद की है। इस हस्तक्षेप के कारण आगामी 19 अप्रैल को प्रस्तावित भूमि पूजन कार्यक्रम अब अधर में लटक गया है।

अब यह ​​मामला भूमि के स्वामित्व और उसके उपयोग को लेकर फंसा है। एक तरफ जहां भवन निर्माण विभाग का दावा है कि सरकार और सारण जिला प्रशासन से अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम शुरू किया गया है, वहीं दूसरी ओर जिला परिषद इसे अपनी निजी संपत्ति बता रहा है।

​सारण जिला परिषद भाग तीन के जिप सदस्य सुनील कुमार राय ने 10 अप्रैल को यहां जिला प्रशासन की कार्रवाई को अवैध करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि जिला परिषद की जमीन पर निर्णय लेने का अधिकार केवल परिषद के हाउस को है।

​ उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा है कि तत्कालीन जिलाधिकारी ने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर नियमों के विरुद्ध उक्त भूमि भवन निर्माण विभाग को आवंटित की थी। उन्होंने कहा कि जेसीबी चलने की सूचना मिलते ही परिषद के अधिकारियों को मौके पर भेजा गया। फिलहाल परिषद द्वारा जमीन की घेराबंदी (बाउंड्री) और गेट लगाने का काम शुरू होगा, ताकि भविष्य में किसी भी अवैध कब्जे को रोका जा सके। मौके पर राजस्व कर्मियों द्वारा विवादित जमीन की नापी कराई जा रही है। प्रशासन और जिला परिषद के बीच छिड़े इस पावर गेम के कारण न्यायालय भवन का निर्माण फिलहाल अनिश्चितकाल के लिए बाधित हो गया है।

मौके पर उपस्थित जिला परिषद सदस्यों ने बताया कि इस जमीन के लिए परिषद पहले ही पूरा प्लान सेट कर चुकी है और प्रोजेक्ट भी तैयार है। इस पर एक भव्य मॉल और आधुनिक दुकानों वाला बाजार बनाने की योजना है। इतना बड़ा मार्केट विकसित किया जाएगा कि दूर-दूर से ग्राहक यहां खरीददारी और व्यापार के लिए आएंगे और लाभ उठाएंगे।

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