अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। आम जनों की सुविधा को ताक पर रखकर लिए गए प्रशासनिक फैसलों का खामियाजा अक्सर आम रहिवासियों को ही भुगतना पड़ता है। सारण जिला के हद में सोनपुर प्रखंड सह अंचल कार्यालय के संचालन की नई व्यवस्था ने इस बात को एक बार फिर सच साबित कर दिया है।
बताया जाता है कि पुराने जर्जर भवन के स्थान पर नए भवन के निर्माण के नाम पर कार्यालय को मुख्य शहर से सात किलोमीटर दूर दुधैला पंचायत के मखदुमपुर गांव में शिफ्ट कर दिया गया है, जिसने आम जनता की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी है। ज्ञात हो कि प्रशासनिक भवन बनाना जरूरी है, लेकिन इस प्रक्रिया में प्रशासन को जनता से इतना दूर कर देना कि वे अपनी समस्याओं को लेकर पहुंच ही न सकें, न्यायसंगत नहीं जान पड़ता।
धार्मिक अनुष्ठान के साथ शुरुआत, पर सुविधाओं का अभाव
विदित हो कि सोनपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी अरोमा मोदी ने बीते दो अप्रैल को सत्यनारायण भगवान की पूजा-अर्चना के बाद मखदुमपुर स्थित पंचायत सरकार भवन में नए अस्थायी कार्यालय का विधिवत उद्घाटन किया था। उद्घाटन तो हो गया, लेकिन इसके साथ ही मुख्य परिसर में सन्नाटा पसर गया और ग्रामीण इलाकों की जनता के लिए दुश्वारियों का नया दौर शुरू हो गया।
प्रशासन के इस कदम को अदूरदर्शी बताते हुए प्रखंड क्षेत्र के रहिवासियों ने कड़ा रोष जताया है। सबसे अधिक परेशानी दूर-दराज के गांवों से आने वाली महिलाओं, गरीब किसानों और मजदूरों को हो रही है। दूरी के गणित का आकलन कीजिएगा तो सोनपुर मुख्यालय से यह नया केंद्र 7 किलोमीटर दूर है। सबलपुर दियारा क्षेत्र की पंचायतों से इसकी दूरी 10 से 12 किलोमीटर तक हो जाती है।
मखदुमपुर तक जाने के लिए न तो सुलभ यातायात उपलब्ध है और न ही कोई वाहन चालक आसानी से जाने को तैयार होता है। जो तैयार होते हैं, वे मनमाना किराया वसूल रहे हैं।
जानकारों का मानना है कि नए भवन के निर्माण तक विभाग के पास अनुमंडल या प्रखंड मुख्यालय के आसपास ही कई अन्य विकल्प मौजूद थे। यदि प्रशासन संवेदनशीलता दिखाता, तो कार्यालय को इतनी दूर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती।
पूर्व विधायक ने भी जताई नाराजगी, डीएम से की बात
सोनपुर के पूर्व विधायक डॉ रामानुज प्रसाद ने 10 अप्रैल को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि बिना नागरिक सुविधाओं और सुरक्षित सड़क के कार्यालय को शिफ्ट करना जनता के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि नये प्रखंड कार्यालय में न तो पानी-बिजली की उचित व्यवस्था है और न ही यातायात की। प्रशासन को अविलंब इस पर ध्यान देना चाहिए। पूर्व विधायक ने इस गंभीर मुद्दे पर सारण के जिला पदाधिकारी (डीएम) से फोन पर बात की है। उन्होंने डीएम को वस्तुस्थिति से अवगत कराते हुए मांग की है कि जब तक कार्यालय यहां संचालित है, तब तक वहां जनता के लिए पानी, लाइट, बैठने की व्यवस्था और सबसे महत्वपूर्ण सुलभ यातायात की व्यवस्था बहाल की जाए।
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