अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला प्रशासन ने केंद्र सरकार की ज्ञान भारतम योजना के तहत जिले की लुप्त होती ऐतिहासिक पांडुलिपियों को सहेजने के लिए एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य प्राचीन ज्ञान को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल तकनीक के माध्यम से भविष्य की पीढ़ियों के लिए सुरक्षित करना है।
अभियान के मुख्य बिंदु एवं लक्ष्यों पर ध्यान दें तो ताड़ के पत्तों, भोज-पत्र और पुराने कागजों पर अंकित आयुर्वेद, खगोल विज्ञान, साहित्य और क्षेत्रीय इतिहास का डिजिटलीकरण करना शामिल है। इसके लिए मंदिर (सारण जिला का हरिहरनाथ तथा आमी), मठ, पुरानी रियासतें (हथुआ, बेतिया राज), शैक्षणिक संस्थान और व्यक्तिगत संग्रह आदि स्रोत का उदाहरण के रूप में नाम लिया जा सकता है।
सारण के जिलाधिकारी (डीएम) वैभव श्रीवास्तव ने स्वयं चिरांद में ज्योतिषाचार्य की पांडुलिपियों का अवलोकन किया, वहीं उप विकास आयुक्त (डीडीसी) लक्ष्मण तिवारी ने भिखारी ठाकुर के पैतृक गांव कुतुबपुर का दौरा कर ऐतिहासिक दस्तावेजों का जायजा लिया। कम से कम 75 वर्ष पुरानी पांडुलिपि रखने वाले व्यक्ति या संस्थाएं प्रशासन से संपर्क कर सकते हैं।
पांडुलिपियों का मालिकाना हक मूल स्वामी के पास ही रहेगा। प्रशासन केवल उनका वैज्ञानिक डिजिटलीकरण कर उन्हें राष्ट्रीय डिजिटल रिपॉजिटरी का हिस्सा बनाएगा। इस ऐतिहासिक कार्य में योगदान देने वाले रहिवासियों और संगठनों को जिलाधिकारी द्वारा सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा। रहिवासी अपने नजदीकी प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर, जिला कला संस्कृति पदाधिकारी या जिला जनसंपर्क कार्यालय में सूचना साझा कर सकते हैं।
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