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वन बचाव समिति ने पीसीसीएफ को सौंपा मांग पत्र, जंगल संरक्षण को ले की मांग

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। झारखंड की राजधानी रांची में वन संरक्षण को लेकर वन बचाव समिति के सदस्यों ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) झारखंड को विस्तृत मांग पत्र सौंपा। इस दौरान समिति के सदस्यों ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में जंगलों की सुरक्षा, अवैध कटाई पर रोक तथा स्थानीय ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा को लेकर कई महत्वपूर्ण मांग रखी।

समिति द्वारा सौंपे गए मांग पत्र में प्रमुख रूप से जंगलों में हो रहे अवैध कटाई पर तत्काल रोक लगाने, अतिक्रमण हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने, वन माफियाओं पर कड़ी कानूनी कार्रवाई करने तथा वन क्षेत्र में नियमित गश्ती बढ़ाने की मांग की गई। इसके अलावा स्थानीय ग्रामीणों और वन आश्रितों को उनके पारंपरिक अधिकार दिलाने, वन प्रबंधन में ग्राम सभाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने और संयुक्त वन प्रबंधन समितियों को सक्रिय करने की भी मांग उठाई गई।

मांग पत्र में कहा गया कि वन क्षेत्र में विकास कार्यों के नाम पर हो रहे अंधाधुंध दोहन पर रोक लगाई जाए और किसी भी परियोजना से पहले पर्यावरणीय मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। साथ ही वन क्षेत्रों में पौधारोपण अभियान को तेज करने और उसकी निगरानी के लिए ठोस व्यवस्था बनाने की बात कही गई।

समिति के केंद्रीय उपाध्यक्ष विष्णु चरण महतो ने कहा कि झारखंड की पहचान उसके जंगलों से है। कहा कि यदि जंगल सुरक्षित नहीं रहेंगे तो यहां की संस्कृति, पर्यावरण और ग्रामीण जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाएगा। उन्होंने कहा कि आज जिस तेजी से अवैध कटाई और अतिक्रमण बढ़ रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। सरकार और वन विभाग को इस दिशा में सिर्फ कागजी कार्रवाई नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर ठोस और प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वन संरक्षण में स्थानीय ग्रामीणों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना अनिवार्य है।

केंद्रीय सदस्य आनंद महतो ने कहा कि वन क्षेत्र में लगातार हो रहे दोहन से पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ रहा है, जिसका असर सीधे जलवायु और खेती-किसानी पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए तो आने वाली पीढ़ियों को गंभीर संकट का सामना करना पड़ेगा। उन्होंने सरकार से अपील करते हुए कहा कि वन माफियाओं पर सख्त कार्रवाई के साथ-साथ वन विभाग की जवाबदेही भी तय की जाए, ताकि इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सके।

बोकारो जिला के हद में कसमार प्रखंड वन बचाव समिति के गंगाधर महतो ने 8 अप्रैल को जारी अपने बयान में कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले रहिवासी सदियों से जंगलों की रक्षा करते आए हैं, लेकिन आज उन्हें ही उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है। वही रामगढ़ जिला के हद में गोला वन बचाव समिति के हरी बोल महतो ने कहा कि वन अधिकार कानून को सही तरीके से लागू करने, ग्राम सभाओं को मजबूत करने और स्थानीय स्तर पर निगरानी व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जब तक ग्रामीणों को वन संरक्षण में भागीदार नहीं बनाया जाएगा, तब तक इस दिशा में स्थायी सफलता मिलना मुश्किल है। समिति ने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई, तो वे व्यापक जनआंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

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