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संघर्षों की उपज होता है मजदूर नेता-केएन त्रिपाठी

कथारा क्षेत्र में राकोमसं सीसीएल रीजनल समिति की बैठक संपन्न

एस. पी. सक्सेना/बोकारो। इंटक से संबद्ध राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ सीसीएल रीजनल समिति के आह्वान पर 8 अप्रैल को बोकारो जिला के हद में ऑफिसर्स क्लब कथारा में एक बैठक आयोजित किया गया। अध्यक्षता रीजनल अध्यक्ष बी एन पांडेय तथा संचालन जारंगडीह शाखा अध्यक्ष योगेंद्र सोनार ने की।

आयोजित राकोमसं रीजनल समिति की बैठक को संबोधित करते हुए बतौर मुख्य अतिथि इंडियन नेशनल माइंस वर्कर फेडरेशन के केंद्रीय अध्यक्ष सह झारखंड सरकार के पुर्व मंत्री के. एन. त्रिपाठी ने कहा कि राजनीति करने वाले जनता के वोटो से जीतकर विधायक, सांसद तथा मंत्री बनते हैं, लेकिन एक मजदूर नेता केवल मजदूरों की राजनीति करता है। वह केवल मजदूर हित में सोंचता है। इसलिए मजदूर नेता नि:स्वार्थ भाव से सेवा देता है। उन्होंने कहा कि मजदूरों का नेता संघर्षों की उपज होता है। उन्होंने कहा कि न्यायालय में विवाद के निबटारे को लेकर फेडरेशन द्वारा उन्हें तीनों गुटों में एका बनाने को लेकर कार्य सौंपा गया था। उनके द्वारा इसके लिए प्रयास जारी है।

त्रिपाठी ने कहा कि प्रबंधन में बैठे कुछ तानाशाह किस्म के अधिकारी मजदूरों का शोषण करने और कमीशन खोरी में लिप्त रहते हैं। ऐसे अधिकारियों को सबक सिखाने की जरूरत है। कहा कि यदि आपको परेशानी हो रही हो तो आप मुझे बुलाए, मेरे ऊपर 17 मामले दर्ज हैं। एक और मामला सही। वे वैसे कमिशनखोर अधिकारियों को सबक सिखाने का काम करेंगे।

यूनियन के सीसीएल रीजनल सचिव वरुण कुमार सिंह ने कहा कि मजदूरों की छंटनी करने में प्रबंधन लगी है। कहा कि बीते 10 वर्षों से अधिक समय से अधिकारियों की तो बहाली की गई है, लेकिन कामगारों की नहीं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब कोल इंडिया का उत्पादन लक्ष्य कम था, लेकिन मजदूरों की संख्या साढ़े चार लाख थी। आज स्थिति यह है कि उत्पादन कई गुना अधिक कर दिया गया है, लेकिन मजदूरों की संख्या आज डेढ़ लाख रह गई है। साथ ही प्रबंधन लगातार मजदूरों की समस्याओं की अनदेखी कर रही है। उन्होंने कहा कि कोयला उद्योग का राष्ट्रीयकरण कांग्रेस की देन है।

प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1969 और 1971 में दो फेज में कोयला उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था, ताकि शोषण से मजदूरों की रक्षा किया जा सके। कांग्रेस तथा राकोमसं ऐसे ही कोयला उद्योग को बर्बाद होने नहीं देगी। जरूरत पड़ी तो कोयला मजदूर प्रबंधन की ईट से ईट बजा देगा।

राकोमसं केंद्रीय उपाध्यक्ष तारापदो धीवर ने कहा कि केंद्र सरकार सामंतवादियों के इशारे पर केवल कोयला उद्योग के अस्तित्व को बेच रही है। इसे रोकना अनिवार्य है। बैठक को इसके अलावा राकोमसं महामंत्री ललन चौबे, अध्यक्ष अभय दूबे, रीजनल अध्यक्ष बी. एन. पांडेय, रीजनल कमिटी कोषाध्यक्ष पंकज दूबे, मुख्यालय रांची के अध्यक्ष आर. पी. सिंह, बीएंडके क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव उदय प्रताप सिंह उर्फ कुट्टू सिंह, ढोरी क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव मंगरा उरांव, कथारा क्षेत्र के क्षेत्रीय अध्यक्ष मो. वकील अंसारी, बरका-सयाल क्षेत्र के क्षेत्रीय सचिव बचन पांडेय, कुजू के क्षेत्रीय सचिव मो. अताउल्लाह, अध्यक्ष सुनील सिंह, बरका-सयाल के क्षेत्रीय अध्यक्ष खजान सिंह, पिपरवार के क्षेत्रीय अध्यक्ष सतीश पांडेय, गिरिडीह के क्षेत्रीय सचिव ऋषिकेश मिश्रा, बीएंडके क्षेत्र के संजय सिंह, रजरप्पा के क्षेत्रीय सचिव राजेंद्र नाथ चौधरी, अध्यक्ष अख्तर आजाद, पिपरवार के क्षेत्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश, आम्रपाली के क्षेत्रीय सचिव जेया आलम, मगध सचिव भानु प्रताप सिंह, अध्यक्ष संतोष कुमार, चरही (हजारीबाग) के क्षेत्रीय सचिव अशोक गंझु आदि ने भी अपने विचार व्यक्त की।

इससे पूर्व आरसीएमएस कथारा क्षेत्र द्वारा मुख्य अतिथि केएन त्रिपाठी को भारी भरकम माला पहनाकर सम्मानित किया गया। मौके पर अशोक ओझा, अंजनी सिंह, संजय सिंह, किशुन मंडल, ब्रजेश सिंह, हरेंद्र सिंह, राजीव सिंह, रिंटू सिंह, मनोज सिंह, सुबोध कुमार, कृष्णा हरि, शैलेंद्र मुखी अशोक हाडी, कुंजेश्वर मंडल, परशुराम, संजय कुमार सहित सैकड़ो यूनियन समर्थक उपस्थित थे।

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