एस. पी. सक्सेना/मुजफ्फरपुर (बिहार)। बिहार के मुजफ्फरपुर की पहचान लीची के वृक्षों, पर्यावरण, संस्कृति और स्थानीय पहचान के संरक्षण के उद्देश्य से संचालित लीचीपुरम सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियान के तहत एक अनूठी पहल देखने को मिल रही है।
इसी क्रम में एमईटी इंजीनियरिंग कॉलेज मुजफ्फरपुर में 7, 8 एवं 9 अप्रैल को आयोजित होने वाले तीन दिवसीय इंटर कॉलेज फेस्ट की तैयारियाँ अब अंतिम चरण में पहुँच चुकी हैं।
उक्त जानकारी मुजफ्फरपुर के सामाजिक कार्यकर्त्ता सह पर्यावरण वीद सुरेश गुप्ता ने 6 अप्रैल को दी। उन्होंने बताया कि एमआईटी कॉलेज के प्रोग्राम कोऑर्डिनेटर प्रो. आशीष कुमार के सहयोग से इस आयोजन की विशेषता लीचीपुरम आर्ट थीम है, जिसके अंतर्गत परिसर के वृक्षों को कलात्मक रूप से सजाया जा रहा है, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त संदेश दिया जा सके।

उल्लेखनीय है कि देर रात तक कलाकारों की टीम पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य में जुटी है। मोबाइल टॉर्च की रोशनी में भी कार्य जारी रखते हुए नॉर्थ बिहार इंस्टिट्यूट ऑफ फाइन आर्ट एंड क्राफ्ट के निदेशक आनंद कुमार के नेतृत्व में विनीता कुमारी, श्वेता कुमारी, राजलक्ष्मी, उदित राज, निखिल कुमार, सुशांत कुमार, आराध्या कुमारी, अंशु प्रिया एवं मनोरंजन कुमार जैसे युवा कलाकार कार्यक्रम की सफलता हेतु दिन-रात एक किए हैं।
अभियान के संस्थापक पर्यावरणविद् सुरेश गुप्ता ने बताया कि यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि लीची बचे, पहचान बचे का एक जनजागरण अभियान है, जो समाज को प्रकृति और संस्कृति के संरक्षण के प्रति जागरूक करेगा। उन्होंने मीडिया प्रतिनिधियों से इस अनूठे आयोजन में पधारकर कार्यक्रम का अवलोकन करने एवं इसे व्यापक रूप से प्रकाशित/प्रसारित करने का आग्रह किया है। साथ हीं मिलकर लीची की मिठास के साथ अपनी संस्कृति और पर्यावरण को बचाने का संकल्प लेंने की बात कही है।
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