विरासत को आगे बढ़ाने व् जे.पी. सम्मान योजना के विसंगतियों को दूर करने का संकल्प
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिला के हद में दिघवारा में 4 अप्रैल को जेपी सेनानियों की एक महत्वपूर्ण परिचर्चा आयोजित की गई। स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय देवेंद्र कुमार सिंह के आवासीय परिसर में आयोजित इस बैठक का मुख्य केंद्र देश की अखंडता, लोकतंत्र की मजबूती और सामाजिक जिम्मेदारियों के निर्वहन में जेपी सेनानियों की भूमिका रहा।
जानकारी के अनुसार आयोजित बैठक में उपस्थित वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि जिस प्रकार स्वतंत्रता सेनानियों ने देश को गुलामी से मुक्त कराया, उसी प्रकार जेपी सेनानी लोकतंत्र की रक्षा और राष्ट्र निर्माण के ध्वजवाहक बने रहेंगे। परिचर्चा के दौरान जे.पी. सम्मान योजना की विसंगतियों को दूर करने की मांग उठी। इसके विस्तार और उसमें व्याप्त खामियों पर विस्तार से चर्चा की गयी। सेनानियों ने परिचर्चा में कई बिंदुओं पर ध्यान आकृष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में 1974 के आंदोलन के दौरान मीसा या डीआईआर के तहत जेल जाने वालों को पेंशन मिल रही है।
महिलाओं के लिए नियमों में लचीलापन है, लेकिन उन्हीं धाराओं में जेल गए पुरुष सेनानी आज भी इस सम्मान से वंचित हैं। यानी पुरुष सत्याग्रहियों की अनदेखी हो रही है। कहा गया कि जुलाई 1974 में विधानसभा घेराव और सत्याग्रह के दौरान हजारों कार्यकर्ताओं को सीसी एक्ट और आईपीसी की धाराओं के तहत गिरफ्तार कर राज्य के विभिन्न जेलों में भेजा गया था। इन सेनानियों को अब तक सम्मान योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
बैठक में कहा गया कि सरकार के गृह (विशेष) विभाग के वर्ष 2015 के संकल्प के अनुसार, एक माह से कम जेल काटने वाले या भूमिगत रहकर आंदोलन करने वाले सेनानियों को प्रशस्ति पत्र दिया जाना था, जो अब तक लंबित है। बैठक में परिचर्चा के दौरान योजना के विस्तारीकरण और सरकार के साथ संवाद स्थापित करने के लिए एक चार सदस्यीय विशेष समिति बनाई गई जिसके सदस्य नागेश्वर प्रसाद सिंह, तेजनारायण सिंह, हरिकांत अकेला और डॉ मोहम्मद मुस्तफा बनाए गए। यह समिति सेनानियों की समस्याओं का अध्ययन करेगी और सरकार तक अपनी मांगों को प्रभावी ढंग से पहुँचाने का कार्य करेगी।
बैठक में सेनानियों ने प्रशासनिक उदासीनता पर भी रोष प्रकट किया और कहा कि पहचान पत्र होने के बावजूद संवादहीनता के कारण परिवहन निगम की बसों में मुफ्त यात्रा और अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। सेनानियों ने मांग की कि अन्य राज्यों की तर्ज पर बिहार में भी जेपी सेनानियों के निधन पर उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाए। सेनानियों ने जोर दिया कि बिहार इस आंदोलन की जननी रहा है, इसलिए यहां यह सम्मान अनिवार्य रूप से लागू होना चाहिए। मौके पर प्रसिद्ध जेपी सेनानी रघुपति, रामबिहारी सिंह, बी.के. सिंह, कृष्ण कुमार गांधी, चंद्रशेखर आजाद सहित कई गणमान्य सेनानी उपस्थित थे।
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