एस. पी. सक्सेना/सतना (मध्यप्रदेश)। मध्यप्रदेश के सतना जिला के हद में स्थित मां शारदा देवी की पवित्र नगरी मैहर इन दिनों प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है। खासतौर पर मैहर के वार्ड क्रमांक एक, जो मेला क्षेत्र होने के साथ-साथ नगर का सबसे अधिक जनसंख्या वाला वार्ड भी है, वहां के जनप्रतिनिधियों की अनदेखी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
बताया जाता है कि मैहर नगरपालिका वार्ड एक की पार्षद एवं नग पालिका अध्यक्ष गीता संतोष सोनी ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मां शारदा लोक जैसी महत्वपूर्ण परियोजना से संबंधित अहम बैठक में उन्हें आमंत्रित तक नहीं किया गया।
ज्ञात हो कि यह वही परियोजना है, जो मैहर की धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊंचाई देने जा रही है। बावजूद इसके स्थानीय जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करना प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगाता है। इसे लेकर नगरपालिका अध्यक्ष गीता का कहना है कि उनके वार्ड में इतनी बड़ी परियोजना पर कार्य हो रहा है और उन्हें जानकारी नहीं दी जा रही, यह सीधी-सीधी मनमानी और तानाशाही है। उन्होंने कहा कि कोई भी सरकारी परियोजना केवल प्रशासन की बपौती नहीं है। उसमें जनता द्वारा चुने गये प्रतिनिधियों की भागीदारी अनिवार्य है।
उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इसी तरह जनप्रतिनिधियों की अनदेखी होती रही, तो यह मामला जनआंदोलन का रूप ले सकता है। इसके अलावा नगरपालिका अध्यक्ष द्वारा क्षेत्र में रात के समय गरीबों के रोजगार पर कार्रवाई को लेकर भी नाराजगी दिख रहा है। आरोप है कि प्रशासनिक कार्रवाई से कई रहिवासियों की रोजी-रोटी पर असर पड़ा है, जिससे वे आर्थिक संकट के कगार पर पहुंच गए हैं। बड़ा सवाल है कि क्या विकास कार्यों के नाम पर जनप्रतिनिधियों की अनदेखी उचित है या फिर यह प्रशासनिक तानाशाही का संकेत है? मैहर की जनता जवाब चाहती है।
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