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वासंती चैती छठ महापर्व के तीसरे दिन डूबते सूर्य को व्रतियों ने दिया अर्घ्य

उदयकालीन भास्कर को अर्घ्य के साथ होगी आज व्रत की पूर्णाहुति

अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। वासंती चैती छठ महापर्व के तीसरे दिन 24 मार्च को सोनपुर सहित सम्पूर्ण सारण जिले में व्रतियों ने डूबते भास्कर की उपासना करते हुए उन्हें प्रथम अर्घ्य (संध्या अर्घ्य) प्रदान किया।

इस अवसर पर छठ व्रतियों ने अपने परिवार के साथ नारायणी नदी एवं गंगा नदी के विभिन्न पवित्र घाटों, तालाब व जलाशय के किनारे खड़े होकर सूर्य देव और छठी मैया को जल और दूध अर्पित किया। ज्ञात हो कि पर्व के चौथे दिन 25 मार्च को उदयकालीन भास्कर को अर्घ्य के साथ छठ व्रत की पूर्णाहुति होगी।

बताया जाता है कि अर्घ्य के समय 24 मार्च को सरयू नदी के विभिन्न घाटों, गंगा – गंडकी के संगम के घाट सबलपुर, पहलेजा धाम घाट, नमामि गंगे घाट सहित विभिन्न घाटों पर व्रतियों ने बांस के सूप में ठेकुआ, फल, गन्ना, डाभ, नींबू, मूली, ईख, सेव, संतरा और पारंपरिक पकवान सजाकर सूर्य देव को अर्पित किया।

हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत-डॉ त्रिभुवन झा

जिला के हद में सोनपुर प्रखंड के सबलपुर स्थित प्रसिद्ध संकटमोचन मंदिर के चिंतक एवं बुद्धिजीवी डॉ त्रिभुवन झा बताते हैं कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देना इस बात का प्रतीक है कि हम न केवल उगते हुए (सफलता), बल्कि अस्त होते (संघर्ष या अंत) सूर्य का भी सम्मान करते हैं। यह सिखाता है कि हर अंत एक नई शुरुआत का संकेत है। उन्होंने बताया कि आध्यात्मिक मान्यताओं के अनुसार, संध्या के समय सूर्य की अंतिम किरण (प्रत्यूषा) की पूजा की जाती है, जो सूर्य की शक्ति का ही रूप है। मान्यता है कि सूर्य पुत्र कर्ण और माता द्रौपदी ने भी इसी विधि से सूर्य उपासना कर विजय और समृद्धि प्राप्त की थी।

सूर्यास्त के समय पराबैंगनी किरणें सबसे कम हानिकारक और शरीर के लिए लाभदायक होती हैं। इस समय सूर्य के संपर्क में आने से शरीर को प्राकृतिक विटामिन डी प्राप्त होता है और प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। इसके साथ ही पानी में खड़े होकर अर्घ्य देने से सोलर बायो-इलेक्ट्रिसिटी का प्रवाह बढ़ता है, जो शरीर के विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने और मानसिक शांति प्रदान करने में सहायक होता है। उन्होंने बताया कि चैत्र मास में मौसम बदलता है। इस दौरान किया गया उपवास और सूर्य उपासना शरीर को बढ़ती गर्मी और संक्रमण से लड़ने के लिए तैयार करती है।

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