एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड की राजधानी रांची स्थित सीसीएल मुख्यालय में 24 मार्च को राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन को लेकर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।
जानकारी के अनुसार सीसीएल मुख्यालय दरभंगा हाउस सभागार में आयोजित राजभाषा हिंदी के प्रभावी कार्यान्वयन एवं संवैधानिक अनुपालन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एकदिवसीय कार्यशाला में मुख्यालय के महाप्रबंधक मानव संसाधन सहित विभिन्न विभागों के राजभाषा नोडल अधिकारी एवं सहायक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।
राजभाषा कार्यान्वयन संबंधी नीति विषय पर आधारित कार्यशाला का आयोजन सीसीएल के मानव संसाधन विभाग एवं राजभाषा विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। जिसका विधिवत उद्घाटन मुख्य अतिथि महाप्रबंधक (मानव संसाधन) एम. एफ. हक द्वारा किया गया।
अपने संबोधन में महाप्रबंधक (मानव संसाधन) हक ने राजभाषा विभाग द्वारा किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि राजभाषा हिंदी का प्रयोग हमारा संवैधानिक उत्तरदायित्व है। हमें इसे अपनी कार्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बनाना चाहिए।
कार्यशाला के मुख्य वक्ता डॉ दिविक दिवेश ने प्रतिभागियों को राजभाषा अधिनियम की धारा 3(3), संविधान के अनुच्छेद 343 तथा संसदीय राजभाषा समिति के निरीक्षणों से संबंधित महत्वपूर्ण तकनीकी जानकारियां प्रदान की। उन्होंने विशेष रूप से तिमाही प्रगति रिपोर्ट को सही ढंग से भरने तथा तकनीकी एवं विधिक शब्दावली के सरल हिंदी प्रयोग पर विस्तार से प्रकाश डाला।
डॉ दिवेश ने उपस्थित नोडल अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे राजभाषा के सफल क्रियान्वयन की प्रमुख कड़ी हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कार्यालयों में अधीक्षकों एवं कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली टिप्पणी (नोटिंग) और आलेखन (ड्राफ्टिंग) का कार्य अनिवार्य रूप से हिंदी में किया जाना चाहिए।
कार्यशाला के दौरान राजभाषा प्रोत्साहन पुरस्कार योजनाओं की भी विस्तृत जानकारी दी गई, जिससे कर्मचारियों को अधिकाधिक हिंदी में कार्य करने हेतु प्रेरित किया जा सके। इस अवसर पर विभिन्न विभागों के राजभाषा नोडल अधिकारी एवं सहायक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन भविष्य में शत-प्रतिशत राजभाषा अनुपालन सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ किया गया।
कार्यशाला को सफल बनाने में वरीय प्रबंधक (भूगर्भ विभाग) विकास सिंह, प्रबंधक (खनन) सी.एस.पी. सिंह, मुख्य प्रबंधक (मानव संसाधन) जे.बी.आर. कुजूर, अनुवादक राजेश कुमार तथा अनुवादक (प्रभार) कुमार अविनाश की सराहनीय भूमिका रही।
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