सकारात्मक तनाव प्रबंधन शिक्षक के गुणात्मक विकास में सहायक-जी. एन. खान
एस. पी. सक्सेना/बोकारो। बोकारो जिला के हद में डीएवी पब्लिक स्कूल सीसीएल कथारा में शिक्षकों के त्रि- दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। कार्यशाला के दूसरे दिन 22 मार्च को एक से बढ़कर एक ज्ञानवर्धक सत्रों का क्रियान्वयन किया गया। कार्यशाला में सर्वप्रथम सामान्य विषय पर आधारित सत्रों का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर बाल -वाटिका, प्राथमिक, माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक तीन स्तरों पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। बाल -वाटिका एवं प्राथमिक स्तर पर डीएवी कथारा के प्राचार्य-सह झारखंड जोन-आई के सहायक क्षेत्रीय पदाधिकारी (एआरओ) डॉ जी.एन. खान ने महत्वपूर्ण विषय अभिभावकों को शिक्षा के विषय में शिक्षित करना सत्र में ब्याख्यान दिया। वहीं माध्यमिक स्तर पर डीएवी खलारी के प्राचार्य डॉ कमलेश कुमार ने तनाव प्रबंधन विषय पर ज्ञानवर्धक ब्याख्यान प्रस्तुत किया। जबकि, उच्चतर माध्यमिक स्तर पर विद्यालय के एसटीएनसी नागेंद्र प्रसाद ने मानसिक स्वास्थ्य एवं स्वच्छता विषय पर सत्र लिया। इस अवसर पर कार्यशाला में उपस्थित शिक्षक -शिक्षिकाओं ने पूरे मनोयोग से उपरोक्त सत्रों में सहभागिता दिखाई।

विद्यालय के प्राचार्य सह एआरओ कार्यशाला के मेजबान डॉ जी.एन. खान ने द्वितीय दिवस के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर उपस्थित शिक्षक- शिक्षिकाओं का आभार जताया। उन्होंने सामान्य एवं विषय विशेष सत्रों की सराहना की। सामान्य विषयों में उन्होंने तनाव प्रबंधन विषय को वर्तमान समय के लिए विशेष रूप से उपयोगी बताया। उन्होंने बताया कि तनाव के भी दो पहलू होते हैं सकारात्मक एवं नकारात्मक। हमें इसके सकारात्मक पहलू मसलन विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास, आदर्श व्यक्तित्व निर्माण पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। कक्षागत तनाव से दूर रहने के उपाय ढूंढने चाहिए। कहा कि यदि हमने इस तनाव पर नियंत्रण पा लिया तो नि: संदेह हम गुरु -शिष्य की महान भारतीय परंपरा के संवाहक बनें रहेंगे।
उन्होंने कार्यशाला के सफल संचालन के लिए डीएवी पब्लिक स्कूल स्वांग की प्राचार्या डोलन चंपा बनर्जी, डीएवी पब्लिक स्कूल खलारी के प्राचार्य डॉ कमलेश कुमार, डीएवी ललपनिया के प्राचार्य तन्मय बनर्जी एवं डीएवी पब्लिक स्कूल दुग्धा के प्राचार्य प्रसेनजीत पॉल को उनकी उपस्थिति के लिए विशेष रूप से साधुवाद दिया। कार्यशाला के विषयवार सफल संचालन हेतु तीनों स्तरों (प्राथमिक, माध्यमिक, उच्चतर -माध्यमिक) के विषय समन्वयकों की भी प्राचार्य ने सराहना की।
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