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मुंबई क्लाइमेट वीक में झारखंड के सियारी पंचायत की प्रेरक कहानी

विजय कुमार साव/गोमिया (बोकारो)। महाराष्ट्र के मुंबई में क्लाइमेट वीक कार्यक्रम में झारखंड के बोकारो जिला के हद में सियारी पंचायत की प्रेरक कहानी मुखिया की जुबानी आकर्षण का केंद्र रहा। सियारी पंचायत की विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधियों ने सराहना की।

आयोजित मुंबई क्लाइमेट वीक कार्यक्रम में झारखंड से कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत के सदस्यों ने सक्रिय भागीदारी की। इस अवसर पर बोकारो जिला के हद में गोमिया प्रखंड के सियारी पंचायत के मुखिया रामवृक्ष मुर्मू, हजारी पंचायत की मुखिया तारा मणी भोक्ता एवं मुखिया चन्द्र देव कुमार घासी ने पंचायत स्तर पर जलवायु परिवर्तन से निपटने के अनुभव और समाधान प्रस्तुत किए। सियारी पंचायत के मुखिया रामवृक्ष मुर्मू ने अपने संबोधन में पंचायत के बदलते भविष्य की कहानी साझा करते हुए कहा कि उनके बचपन में सियारी हरियाली, घने जंगलों, सालो भर बहती नदियों और भरे तालाबों से समृद्ध थी।

आदिवासी समुदाय के लिए जल-जंगल-जमीन जीवन का आधार रहे हैं। लेकिन समय के साथ जलवायु परिवर्तन और विकास की असंतुलित प्रक्रियाओं का असर दिखने लगा। यहां की तालाब और नदियाँ सूखने लगीं, जबकि राज्य से देश को बिजली देने वाला कोयला निकलने के बावजूद पंचायत के कई हिस्से अंधेरे में रहे। विशेष रूप से बिरहोर टंडा बस्ती में बच्चों को केरोसिन की ढिबरी के सहारे पढ़ना पड़ता था।

मुखिया ने बताया कि वर्ष 2023 में कॉन्फ्रेंस ऑफ पंचायत में पहली बार भागीदारी उनके लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुई। वहाँ जलवायु परिवर्तन, आजीविका और पर्यावरण पर हुई चर्चाओं से उन्हें यह समझ मिली कि उक्त विषय सीधे खेतों, तालाबों और बच्चों के भविष्य से जुड़े हैं। इसी मंच पर डीएमएफटी फंड की उन्हें जानकारी मिली, जिसके माध्यम से पंचायतों में बिजली, पानी और आजीविका से जुड़े कार्य संभव हैं।

मुंबई में आयोजित सम्मेलन से लौटकर सियारी पंचायत में ग्राम सभा और जीपीडीपी के माध्यम से व्यापक चर्चा शुरू हुई। पहले चरण में 17 जलमिनारों पर सोलर पंप लगाने का प्रस्ताव पारित किया गया। इसके बाद बंगाली तालाब में सोलर लिफ्ट इरिगेशन सिस्टम का निर्णय लिया गया, जिससे सालभर खेती संभव हो सके। आगे चलकर बड़े तालाब के पुनर्निर्माण, मछली पालन और बागवानी का प्रस्ताव भी ग्राम सभा से पारित किया गया। आज वही तालाब पुनर्जीवित हो रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं और भविष्य में ग्राम पर्यटन की संभावनाएँ भी खुल रही है।

मुखिया रामवृक्ष मुर्मू ने विश्वास के साथ कहा कि बिजली, पानी और आजीविका इन तीन स्तंभों पर आधारित डीएमएफटी फंड का उपयोग सियारी पंचायत के भविष्य को नई दिशा दे रहा है। जहाँ कभी अंधेरा था, वहाँ अब उम्मीद की रोशनी है। मुंबई क्लाइमेट वीक में सियारी पंचायत की इस पहल की विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने सराहना की। झारखंड की ओर से मुन्ना झा और गुलाब चन्द्र प्रजापति के नेतृत्व में बिहार और झारखंड के मुखियाओं ने इस मंच पर सामूहिक रूप से अपनी आवाज़ रखी।

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