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आखिर बिहार सरकार बच्चों की जान खतरे में क्यों डाल रही है?

संतोष कुमार झा/ मुजफ्फरपुर (बिहार)। ये तस्वीर है मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के एक विद्यालय का जिसका नाम है बीएस चंद्रहट्टी कमतौल, प्रखंड कुढ़नी। जहां शिक्षा विभाग के निर्देश के आलोक में लॉक डाउन अवधि के समतुल्य चावल का बंटवारा किया जा रहा है। जिसमें नामांकित बच्चों के अभिवावकों को विद्यालय में बुला कर चावल वितरण किया जा रहा है।

शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार किसी भी स्थिति में बच्चों को विद्यालय नहीं बुलाना है। परंतु करोना कि इस भयावह स्थिति के दौरान विद्यालय प्रबंधन ने विभागीय वाहवाही पाने के लिए बच्चों और जिलेवासियों को संकट में डाल कर बच्चों को ही बिना किसी सुरक्षा मानक के खाद्य वितरण करना शुरू कर दिया।इस बड़ी भूल की जिम्मेदारी कौन लेगा?

स्कूल प्रबंधन, जिला स्तरीय शिक्षा विभाग के पदाधिकारी या फिर राज्य शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे निर्देश देने वाले वरीय अधिकारी जो ऐसे निर्देश देते रहते हैं। जिससे करोना विस्फोट रुकने के बजाय और बढ़ने की संभावना हो। पूरा राज्य अभी लॉक डाउन से गुजर रहा है। सरकार के पास सभी छात्र छात्राओं का आंकड़ा है। अकाउंट नंबर सहित यदि सरकार सही में बच्चों के लिए चिंतित है तो राशन के बदले समतुल्य राशि डीबीटी के माध्यम से चंद मिनटों में बच्चों तक पहुंचा सकती है।

विदित हो कि राज्य सरकार माह मार्च में ऐसा कर चुकी है। चावल के बदले लॉक डाउन अवधि का समतुल्य राशि डीबीटी के माध्यम से दे चुकी है।फिर जब अभी स्थिति और विस्फोटक है तो राज्य को संकट में डालने की क्या जरूरत आ पड़ी है?

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