अस्ताचलगामी व् उदयीमान भगवान भास्कर को दिया जायेगा अर्घ्य
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। सारण जिले में छठ महापर्व के दूसरे दिन 26 अक्टूबर को गंगा – गंडक, सरयू एवं मही नदियों के किनारे, घरों में और तालाबों पर बने घाटों पर छठ व्रतियों ने खरना पूजा का अनुष्ठान पूरा किया। इस अनुष्ठान के साथ ही छठ व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो गया।
ज्ञात हो कि छठ पर्व के दौरान व्रती महिलाएं 27 अक्टूबर की शाम अस्ताचलगामी तथा 28 अक्टूबर की सुबह उदयीमान भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगी। इसके पश्चात इस महापर्व का समापन हो जायेगा। जानकारी के अनुसार जिला के हद में रिविलगंज में सरयू नदी किनारे बने छठ घाटों को सजाया गया है। श्रीनाथ बाबा घाट पर व्रतियों ने सुबह भी पवित्र स्नान किया। दिघवारा, आमी, सोनपुर में भी इसी तरह छठ व्रत के अवसर पर अर्घ्य देने के लिए नदी एवं तालाबों के किनारे घाटों का निर्माण किया गया। सोनपुर-हाजीपुर (वैशाली) मार्ग पुराने गंडक पुल के नीचे नमामि गंगे भारत वंदना घाट छठ व्रतियों के लिए पूरी तरह सज -धज कर तैयार है।
गज -ग्राह चौक से घाट तक सड़क के दोनों किनारे बिजली के झाड़ – फानूस जगमग कर रहा है। इसी तरह सोनपुर के गजेन्द्र मोक्ष मंदिर मार्ग, निषाद घाट और काली घाट मार्ग को सुसज्जित किया गया है। छठ मईया के गीतों से सम्पूर्ण वातावरण गुलज़ार है। इसी तरह पहलेजा धाम में गंगा नदी किनारे घाटों का निर्माण और उसे सजाया गया है। सबलपुर में नारायणी नदी किनारे जगन्नाथ घाट पर भी छठ व्रतियों के लिए कच्चे घाटों का निर्माण किया गया हैं। गंगा नदी किनारे सबलपुर पछियारी टोला में कच्चे घाटों का निर्माण किया गया है। नया बाजार सहित कई स्थानों पर छठ मईया की मूर्तियों की स्थापना की गई है।
वैसे तो छठ महापर्व बीते 25 अक्टूबर को नहाय-खाय के साथ शुरू हो गया है। वहीं 26 अक्टूबर की शाम खरना का अनुष्ठान पूरा हो गया। पहले दिन कि तरह आज भी व्रतियों ने नदियों में स्नान और भगवान भास्कर की पूजा की। खरना के लिए मिट्टी के चूल्हे और आम की लकड़ी के जलावन से अरवा चावल व गुड़ से बनी खीर, रोटी आदि का प्रसाद ग्रहण किया। जिन घरों में व्रत नहीं होता है उन्हें घर पर आमंत्रित कर प्रसाद ग्रहण कराया गया। छठ व्रत की यह लोक परंपरा इसी कारण जीवंत है और जन – जन में लोकप्रिय है। प्रसाद को परिवार और आस-पड़ोस के साथ बांटना शुभ माना जाता है।
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