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कसमार प्रखंड में धूमधाम से मनाया गया जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी

रंजन वर्मा/कसमार (बोकारो)। बोकारो जिला के हद में बेरमो अनुमंडल अंतर्गत कसमार प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों में 26 अगस्त को जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी हर्षोल्लास, अकीदत और आपसी सौहार्द के साथ मनाया गया।

जानकारी के अनुसार प्रखंड के हद में कसमार, गर्री, सुरजुडीह, कुलागूंजू, सोनपुरा, मधुकरपुर, बागदा, बगियारी, मंजूरा सहित विभिन्न गांवों में धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान जगह-जगह जलसा, तकरीर और जुलूस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर आयोजित जलसे में अमन और भाईचारे का संदेश दिया गया।

बताया गया कि ऑल मुस्लिम कमेटी की ओर से जलसा-ए-मिलाद की महफिल सजाई गई। इसमें उलेमा एवं वक्ताओं ने तकरीर पेश करते हुए पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि अल्लाह के बताए रास्ते पर चलकर ही इंसान नेक और बेहतर जिंदगी गुजार सकता है। आमजनों से हर बुरे काम से तौबा करने तथा नबी के बताए रास्ते पर चलकर अपने समाज, कौम और मुल्क की तरक्की के लिए दुआ करने की अपील की गई।

उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी मुसलमानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण अवसर है। कहा गया कि पैगंबर-ए-इस्लाम ने पूरी दुनिया को शांति, प्रेम, इंसानियत और भाईचारे का संदेश दिया। उनके बताए आदर्शों को अपने जीवन में उतारकर समाज में आपसी एकता और सद्भाव को मजबूत किया जा सकता है।

जलसे में बच्चों को माता-पिता की सेवा और सम्मान करने का संदेश भी दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि आज के समय में कई बच्चे अपने वालिदैन की नाफरमानी करते हैं, जो चिंता का विषय है। मां के कदमों तले जन्नत और पिता को जन्नत की कुंजी बताते हुए कहा गया कि मां-बाप की खिदमत में कभी कोई कोताही नहीं बरतनी चाहिए। उनके आशीर्वाद से जीवन में बरकत और सफलता मिलती है।

इस अवसर पर विभिन्न स्थानों से भव्य जुलूस निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में बुजुर्ग, युवा और बच्चे शामिल हुए। मुस्लिम समुदाय हाथों में इस्लामिक झंडे लेकर पूरे उत्साह के साथ जुलूस में शामिल हुए। जगह-जगह जुलूस का स्वागत किया गया। पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह के साथ-साथ आपसी भाईचारे और सौहार्द का माहौल देखने को मिला।

कार्यक्रम के दौरान विधायक प्रतिनिधि मोहम्मद शेरे आलम को मुस्लिम समुदाय ने शॉल ओढ़ाकर एवं माला पहनाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर शेरे आलम ने कहा कि जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी केवल खुशी मनाने का अवसर नहीं, बल्कि पैगंबर-ए-इस्लाम की शिक्षाओं और उनके बताए आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का भी अवसर है। उन्होंने कहा कि पैगंबर साहब ने पूरी दुनिया को अमन, शांति, भाईचारे, इंसानियत और मोहब्बत का पैगाम दिया।

कहा कि समाज की तरक्की तभी संभव है, जब हम आपसी मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के सुख-दु:ख में साथ खड़े हों। हमें अपने बच्चों को अच्छी तालीम देने के साथ-साथ उन्हें बुजुर्गों और माता-पिता का सम्मान करना भी सिखाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मां-बाप की सेवा करना हर इंसान का फर्ज है और परिवार में संस्कार मजबूत होंगे तो समाज भी मजबूत होगा।

कहा कि कसमार की धरती हमेशा से आपसी भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल रही है। सभी समुदाय मिल-जुलकर साथ में त्योहार मनाते हैं और एक-दूसरे की खुशियों में शामिल होते हैं। उन्होंने क्षेत्र में शांति, सौहार्द और भाईचारा बनाए रखने तथा समाज और देश की तरक्की के लिए मिलकर काम करने की अपील की। जुलूस एवं कार्यक्रम को देखते हुए कसमार पुलिस पूरी तरह मुस्तैद रही। भीड़ को नियंत्रित करने एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कसमार थाना प्रभारी कुंदन कुमार पुलिस बल के साथ लगातार निगरानी करते रहे। शांतिपूर्ण माहौल में जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का कार्यक्रम संपन्न हो गया।

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