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ई-कल्याण छात्रवृत्ति को ले एआईएसएफ का आंदोलन, मंत्री के इस्तीफे की मांग

अफजल दुर्रानी के नेतृत्व में छात्रों का मार्च, विभाग द्वारा मांगों पर पहल का आश्वासन

एस. पी. सक्सेना/रांची (झारखंड)। झारखंड के छात्र-छात्राओं की लंबित ई-कल्याण छात्रवृत्ति के भुगतान एवं विभिन्न शैक्षणिक समस्याओं को लेकर 5 नवंबर को ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन (एआईएसएफ) के बैनर तले सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने जोरदार महा आंदोलन किया। नेतृत्व छात्र नेता अफजल दुर्रानी कर रहे थे।

आंदोलन की शुरुआत झारखंड की राजधानी रांची के प्रेस क्लब करमटोली चौक से की गयी। यहां से सैकड़ो छात्रों ने जुलूस एवं मार्च के माध्यम से मोरहाबादी स्थित कल्याण विभाग कार्यालय पहुंचकर विभाग का घेराव किया। इस दौरान छात्रों ने अपने हाथों में छात्रवृत्ति की अनुमोदित रशीद (अप्रूवल रिसीप्ट) एवं विभिन्न मांगों से संबंधित तख्तियां लेकर पहुंचे और सरकार तथा विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

आंदोलन के पश्चात छात्र नेता अफजल दुर्रानी के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कल्याण विभाग के पदाधिकारियों से वार्ता की तथा अपनी 12 सूत्री मांगों से संबंधित मांग-पत्र विभाग के निदेशक को सौंपा। वार्ता के दौरान विभागीय पदाधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि नवंबर माह के भीतर सभी मांगों पर पूर्ण रूप से पहल की जाएगी। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया कि विभाग द्वारा दिए गए आश्वासन के आधार पर संगठन आगे की स्थिति पर नजर रखेगा और मांगों के क्रियान्वयन की समीक्षा करेगा।

आंदोलन के माध्यम से शैक्षणिक सत्र 2023–24, 2024–25 एवं 2025–26 की लंबित ई-कल्याण छात्रवृत्ति का अविलंब भुगतान, सत्र 2025–26 के जिन छात्र-छात्राओं के आवेदन विद्यालय, कॉलेज, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय स्तर से लगभग छह माह पूर्व स्वीकृत हो चुके हैं, उनके लंबित आवेदनों का विभागीय स्तर पर शीघ्र निष्पादन कर भुगतान करने, नई शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के तहत चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के अनुरूप सभी संबंधित शिक्षण संस्थानों में चार वर्षों का बोनाफाइड प्रमाण-पत्र सत्यापित एवं स्वीकृत करने तथा सत्र 2026–27 की छात्रवृत्ति आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ाने की मांग की गई।

इसके अलावा सभी प्रखंड पदाधिकारियों को लंबित आय प्रमाण-पत्रों का शीघ्र निर्गमन करने का निर्देश देने, एसआईआर कार्यो का हवाला देकर आय प्रमाण-पत्र बनाने में हो रही देरी समाप्त करने, सभी स्वीकृत आवेदनों का 15 दिनों के भीतर भुगतान सुनिश्चित करने, ई-कल्याण पोर्टल की तकनीकी एवं विभागीय समस्याओं का समाधान करने, आधार एवं बैंक खाते से संबंधित तकनीकी समस्याओं के कारण रुके छात्रवृत्ति भुगतान को शीघ्र शुरू करने, दूसरे राज्यों में अध्ययनरत झारखंड के विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का सत्यापन एवं समय पर भुगतान सुनिश्चित करने, प्रत्येक जिले में हेल्पलाइन नंबर जारी करने तथा छात्रवृत्ति के लंबित एवं स्वीकृत आवेदनों और भुगतान की स्थिति की साप्ताहिक जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की गई। इसके साथ ही छात्रवृत्ति भुगतान में लगातार हो रही देरी एवं विभागीय लापरवाही की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए कल्याण मंत्री चामरा लिंडा के इस्तीफे की भी मांग की गई।

आयोजित धरना को संबोधित करते हुए छात्र नेता अफजल दुर्रानी ने कहा कि झारखंड जिस उद्देश्य और सपने के साथ अलग राज्य बना था, आज वह उद्देश्य कहीं पीछे छूटता दिखाई दे रहा है। राज्य के आदिवासी, अल्पसंख्यक एवं पिछड़े वर्ग के गरीब मजदूर-किसान परिवारों के बच्चों को छात्रवृत्ति से वंचित रखकर उनकी शिक्षा के रास्ते में बाधाएं खड़ी की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि एक तरफ झारखंड के विधायक और मंत्रियों के बच्चे विदेशों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राज्य के गरीब मजदूर-किसान परिवारों के छात्र-छात्राएं आर्थिक तंगी के कारण अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं।

यह झारखंड की शिक्षा व्यवस्था और सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। कहा कि झारखंड में गठबंधन की सरकार है और कांग्रेस नेता राहुल गांधी देश के विभिन्न शहरों में छात्रों के साथ छात्रों की कुंजी कार्यक्रम के माध्यम से संवाद कर रहे हैं, लेकिन झारखंड में उनकी गठबंधन सरकार होने के बावजूद यहां के छात्र-छात्राओं की समस्याओं पर कोई गंभीर पहल नहीं हो रही है। यदि वे झारखंड के छात्रों के बीच आकर संवाद करते तो उन्हें यहां के छात्रों की वास्तविक स्थिति का पता चलता। कहा कि यह वही राज्य है जहां छात्र कभी प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली और अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन करते हैं, तो कभी अपने हक की छात्रवृत्ति पाने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।

राज्य के कल्याण मंत्री चामरा लिंडा पर निशाना साधते हुए दुर्रानी ने कहा कि मंत्री केंद्र सरकार का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। आप झारखंड के कल्याण मंत्री हैं और राज्य के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराना आपकी जिम्मेदारी है। यदि केंद्र सरकार राशि रोक रही है तो आपने इसके खिलाफ कौन-सा ठोस कदम उठाया? कौन-सा आंदोलन किया? विद्यार्थियों को इसका जवाब मिलना चाहिए। यदि विभाग की जिम्मेदारी नहीं संभल रही है तो मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तत्काल अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि एक तरफ सरकार मंईयां सम्मान योजना के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उन्हीं मंईयां के बच्चों की शिक्षा और छात्रवृत्ति को नजरअंदाज किया जा रहा है। सरकार को समझना होगा कि छात्रवृत्ति कोई सरकारी एहसान नहीं, बल्कि विद्यार्थियों का अधिकार है। गरीब परिवारों के बच्चों की शिक्षा के साथ इस तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गिरिडीह उपचुनाव को लेकर दुर्रानी ने कहा कि छात्रवृत्ति का मुद्दा अब केवल कल्याण विभाग तक सीमित नहीं रहेगा। यदि सरकार ने छात्रों की समस्याओं का समाधान नहीं किया तो आगामी गिरिडीह उपचुनाव में छात्र इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाएंगे और सरकार से जवाब मांगेंगे। छात्र अपने अधिकारों की अनदेखी करने वाली सरकार को सबक सिखाने का काम करेंगे। कहा कि विभागीय पदाधिकारियों ने नवंबर तक सभी मांगों पर पहल करने का आश्वासन दिया है। संगठन इस आश्वासन पर नजर रखेगा। यदि निर्धारित समय के भीतर मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है तो एआईएसएफ राज्यव्यापी एवं व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा। छात्र अपने अधिकारों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक जारी रखेंगे।

मार्च एवं धरना आंदोलन में प्रमुख छात्र नेताओं में एआईएसएफ रांची जिलाध्यक्ष एहतेशाम परवीन, जिला उपाध्यक्ष जमीर अहमद, जिला सदस्य तेजू मिर्धा, राकेश कुमार, खुशबू वहाब चौधरी, अवंतिका कुमारी, रितिका कुमारी, रंजन कुमार, नुसरत जहां सहित अन्य छात्र-छात्रा शामिल थे।

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