कैकेयी के कोप से राम-भरत मिलाप के मर्मस्पर्शी दृश्यों ने दर्शकों का मन मोहा
अवध किशोर शर्मा/सारण (बिहार)। पूर्व मध्य रेल के हद में रेलवे सांस्कृतिक भवन सोनपुर में मंडल कला संगम सोनपुर एवं कार्मिक विभाग द्वारा दुर्गा पूजा के अवसर पर श्रीराम लीला मंचन किया जा रहा है। श्रीराम लीला के माध्यम से श्रीराम के आदर्श जीवन, मर्यादा, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणादायी गाथा को प्रस्तुत किया जा रहा है।
सोनपुर स्टेशन के समीप स्थित सांस्कृतिक भवन में बीते 14 अक्टूबर से आगामी 20 अक्टूबर तक चलने वाले इस महोत्सव के चौथे दिन 17 अक्टूबर को अयोध्या कांड के अंतर्गत मंचित विभिन्न प्रसंग अत्यधिक भावुक और भक्तिमय पलों के नाम रहा। प्रसंगों ने दर्शकों की आंखें नम कर दीं तो दूसरी ओर कुछ प्रसंगों ने पंडाल को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
रामलीला कार्यक्रम की शुरुआत अत्यंत हृदय विदारक प्रसंग से की गयी। जब महारानी कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से अपने दो वचनों भरत के लिए राजसिंहासन और श्रीराम के लिए चौदह वर्ष के वनवास की मांग ने पूरे अयोध्या में शोक की लहर दौड़ा दी। दशरथ का विलाप और माता कौशल्या की ममता का क्रंदन देख दर्शक दीर्घा में बैठे हर शख्स की आंखे नम हो गईं।

पिता के वचनों की लाज रखने और धर्म की रक्षा के लिए श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण का वल्कल वस्त्र धारण कर वन की ओर प्रस्थान करना कर्तव्यनिष्ठा का ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत कर गया, जिसने त्याग और समर्पण की असली परिभाषा समझाई। रामलीला के दौरान गंगा तट का दृश्य अत्यंत मनोरम रहा।
प्रभु श्रीराम के चरणों को पखारने की केवट की जिद और भगवान की वह अछ्वुत मुस्कान मागत मोर नाव न केवटू, आइन कहै तुम्हारहि छोटू ने दर्शकों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर दी। केवट का प्रभु के चरणों के प्रति अनन्य प्रेम देखकर पूरा सभागार जय श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। चित्रकूट की पावन भूमि पर जब भरत अपने आराध्य बड़े भाई राम को मनाने पहुंचे, तो वह मिलन दृश्य भारतीय संस्कृति के भ्रातृ-प्रेम का सर्वोच्च शिखर साबित हुआ।
भरत का विनीत भाव और श्रीराम का उन्हें गले लगाना ऐसा भावुक पल था, जिसने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया। आगामी 18 अक्टूबर को अरण्य कांड के अन्तर्गत सीता हरण, राम-शबरी मिलन और बाली वध के प्रसंग का मंचन होगा। जबकि 19 अक्टूबर को सुंदरकांड एवं लंका कांड के अन्तर्गत लंका दहन, राम सेतु निर्माण, लक्ष्मण शक्ति बाण और रावण-अंगद संवाद का मंचन होगा।
जबकि 20 अक्टूबर को (उत्तर कांड – समापन समारोह) संपन्न होगा, जिसके तहत रावण दहन एवं भव्य राज्याभिषेक मुख्य आयोजन स्थल रेलवे स्टेडियम सोनपुर में होगा।
आयोजकों ने बताया कि रेल मंडल के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत इस भव्य महोत्सव में सभी सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु और आमजन भाग लेकर पुण्य के भागी बन रहे हैं।
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